Sad Poetry (page 160)

दिल मुब्तला-ए-लज़्ज़त-ए-आज़ार ही रहा

दाग़ देहलवी

दिल को क्या हो गया ख़ुदा जाने

दाग़ देहलवी

दिल गया तुम ने लिया हम क्या करें

दाग़ देहलवी

दिल चुरा कर नज़र चुराई है

दाग़ देहलवी

देख कर जौबन तिरा किस किस को हैरानी हुई

दाग़ देहलवी

डरते हैं चश्म ओ ज़ुल्फ़ ओ निगाह ओ अदा से हम

दाग़ देहलवी

बुतान-ए-माहवश उजड़ी हुई मंज़िल में रहते हैं

दाग़ देहलवी

भवें तनती हैं ख़ंजर हाथ में है तन के बैठे हैं

दाग़ देहलवी

भला हो पीर-ए-मुग़ाँ का इधर निगाह मिले

दाग़ देहलवी

बाक़ी जहाँ में क़ैस न फ़रहाद रह गया

दाग़ देहलवी

बात मेरी कभी सुनी ही नहीं

दाग़ देहलवी

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

दाग़ देहलवी

अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का

दाग़ देहलवी

अभी हमारी मोहब्बत किसी को क्या मालूम

दाग़ देहलवी

अब वो ये कह रहे हैं मिरी मान जाइए

दाग़ देहलवी

आरज़ू है वफ़ा करे कोई

दाग़ देहलवी

आप का ए'तिबार कौन करे

दाग़ देहलवी

चेहरे पे नूर-ए-सुब्ह सियह गेसुओं में रात

दाएम ग़व्वासी

बाब-ए-रहमत पे दुआ गिर्या-कुनाँ हो जैसे

दाएम ग़व्वासी

यूँही जलाए चलो दोस्तो भरम के चराग़

डी. राज कँवल

नज़रों के गिर्द यूँ तो कोई दायरा न था

डी. राज कँवल

लोग जिन को आज तक बार-ए-गराँ समझा किए

डी. राज कँवल

किसी ने बा-वफ़ा समझा किसी ने बेवफ़ा समझा

डी. राज कँवल

इंसान नहीं वो जो गुनहगार नहीं हैं

डी. राज कँवल

हम को छेड़ा तो मचल जाएँगे अरमाँ की तरह

डी. राज कँवल

दुनिया पत्थर फेंक रही है झुँझला कर फ़र्ज़ानों पर

डी. राज कँवल

दुनिया में दिल लगा के बहुत सोचते रहे

डी. राज कँवल

बी.टी-नामा

कर्नल मोहम्मद ख़ान

ये हादसा मिरी आँखों से गर नहीं होता

चित्रांश खरे

काएनात-ए-आरज़ू में हम बसर करने लगे

चित्रांश खरे