Sad Poetry (page 162)
बात कहने के लिए बात बनाई न गई
चरख़ चिन्योटी
अक़्ल हैरान है रहमत का तक़ाज़ा क्या है
चरख़ चिन्योटी
लाख कुछ न हम कहते बे-ज़बाँ रहे होते
चरण सिंह बशर
एक मरकज़ पे सिमट आई है सारी दुनिया
चरण सिंह बशर
तय हुआ दिन कि खुले शाम के बिस्तर चलिए
चराग़ बरेलवी
समंदर का सुकूत
चन्द्रभान ख़याल
क़तरा क़तरा एहसास
चन्द्रभान ख़याल
लौट चलिए
चन्द्रभान ख़याल
जंग
चन्द्रभान ख़याल
गुम-शुदा आदमी का इंतिज़ार
चन्द्रभान ख़याल
सभी सम्तों को ठुकरा कर उड़ी जाए
चंद्र प्रकाश शाद
कैसा वो मौसम था ये तो समझ न पाए हम
चंद्र प्रकाश शाद
कभी हवा ने कभी उड़ते पत्थरों ने किया
चंद्र प्रकाश शाद
हर इक इम्कान तक पस्पाई है अपनी
चंद्र प्रकाश शाद
हाए कितना लतीफ़ है वो ग़म
चंद्र प्रकाश जौहर बिजनौरी
वो क्या जवाब दे अर्ज़-ए-सवाल से पहले
चंद्र प्रकाश जौहर बिजनौरी
ज़िंदगी की यही कहानी है
चाँदनी पांडे
ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है
चाँदनी पांडे
उम्र के लम्बे सफ़र से तजरबा ऐसा मिला
चाँदनी पांडे
हमें बर्बादियों पे मुस्कुराना ख़ूब आता है
चाँदनी पांडे
नई-देहली
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
ले उड़ा रंग फ़लक जल्वा-ए-रा'नाई का
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
जहाँ रंग-ओ-बू है और मैं हूँ
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
हर आरज़ू में रंग है बाग़-ओ-बहार का
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
फ़ित्ना-ए-रोज़गार की बातें
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
मौत आएगी उस से मिल लेंगे
चमन लाल चमन
हम से यूँ बे-रुख़ी से मिलते हैं
चमन लाल चमन
ज़िंदगी क्या है अनासिर में ज़ुहूर-ए-तरतीब
चकबस्त ब्रिज नारायण
इस को ना-क़दरी-ए-आलम का सिला कहते हैं
चकबस्त ब्रिज नारायण
इक सिलसिला हवस का है इंसाँ की ज़िंदगी
चकबस्त ब्रिज नारायण