Sad Poetry (page 161)
जो मेरी छत का रस्ता चाँद ने देखा नहीं होता
चित्रांश खरे
हमारे सब्र का इक इम्तिहान बाक़ी है
चित्रांश खरे
दोनों की आरज़ू में चमक बरक़रार है
चित्रांश खरे
या-रब ग़म-ए-हिज्राँ में इतना तो किया होता
चराग़ हसन हसरत
इस तरह कर गया दिल को मिरे वीराँ कोई
चराग़ हसन हसरत
इक इश्क़ का ग़म आफ़त और उस पे ये दिल आफ़त
चराग़ हसन हसरत
ये मायूसी कहीं वज्ह-ए-सुकून-ए-दिल न बन जाए
चराग़ हसन हसरत
या-रब ग़म-ए-हिज्राँ में इतना तो किया होता
चराग़ हसन हसरत
मोहब्बत किस क़दर यास-आफ़रीं मालूम होती है
चराग़ हसन हसरत
जब से तेरा करम है बंदा-नवाज़
चराग़ हसन हसरत
इस तरह कर गया दिल को मिरे वीराँ कोई
चराग़ हसन हसरत
दिल बला से निसार हो जाए
चराग़ हसन हसरत
तरकीब-ए-सर्फ़ी
चाैधरी मोहम्मद नईम
नज़्म
चाैधरी मोहम्मद नईम
तन्हाई में आज उन से मुलाक़ात हुई है
चरख़ चिन्योटी
क़रार खो के चले बे-क़रार हो के चले
चरख़ चिन्योटी
क़रार खो के चले बे-क़रार हो के चले
चरख़ चिन्योटी
मचलेंगे उन के आने पे जज़्बात सैंकड़ों
चरख़ चिन्योटी
जो आँसुओं को न चमकाए वो ख़ुशी क्या है
चरख़ चिन्योटी
जब सर-ए-बाम वो ख़ुर्शीद-जमाल आता है
चरख़ चिन्योटी
हुस्न के जल्वे लुटाए तिरी रा'नाई ने
चरख़ चिन्योटी
हम जो मिल बैठें तो यक-जान भी हो सकते हैं
चरख़ चिन्योटी
हम जो मिल बैठें तो यक जान भी हो सकते हैं
चरख़ चिन्योटी
गुनगुनाती हुई आवाज़ कहाँ से लाऊँ
चरख़ चिन्योटी
फ़ज़ा-ए-ना-उमीदी में उमीद-अफ़ज़ा पयाम आया
चरख़ चिन्योटी
फ़ज़ा में कैफ़-फ़शाँ फिर सहाब है साक़ी
चरख़ चिन्योटी
बे-ख़ुदी में है न वो पी कर सँभल जाने में है
चरख़ चिन्योटी
बज़्म-ए-जानाँ में मोहब्बत का असर देखेंगे
चरख़ चिन्योटी
बज़्म-ए-जानाँ में मोहब्बत का असर देखेंगे
चरख़ चिन्योटी
बात कहने के लिए बात बनाई न गई
चरख़ चिन्योटी