Sad Poetry (page 171)
झूट सच आप तो इल्ज़ाम दिए जाते हैं
बेख़ुद देहलवी
हुआ जो वक़्फ़-ए-ग़म वो दिल किसी का हो नहीं सकता
बेख़ुद देहलवी
हो के मजबूर आह करता हूँ
बेख़ुद देहलवी
हिजाब दूर तुम्हारा शबाब कर देगा
बेख़ुद देहलवी
हज़रत-ए-दिल ये इश्क़ है दर्द से कसमसाए क्यूँ
बेख़ुद देहलवी
हर एक बात तिरी बे-सबात कितनी है
बेख़ुद देहलवी
दोनों ही की जानिब से हो गर अहद-ए-वफ़ा हो
बेख़ुद देहलवी
दिल में फिर वस्ल के अरमान चले आते हैं
बेख़ुद देहलवी
दिल चुरा ले गई दुज़्दीदा-नज़र देख लिया
बेख़ुद देहलवी
दे मोहब्बत तो मोहब्बत में असर पैदा कर
बेख़ुद देहलवी
बेवफ़ा कहने से क्या वो बेवफ़ा हो जाएगा
बेख़ुद देहलवी
बेताब रहें हिज्र में कुछ दिल तो नहीं हम
बेख़ुद देहलवी
बेचने आए कोई क्या दिल-ए-शैदा ले कर
बेख़ुद देहलवी
बनी थी दिल पे कुछ ऐसी की इज़्तिराब न था
बेख़ुद देहलवी
अब किसी बात का तालिब दिल-ए-नाशाद नहीं
बेख़ुद देहलवी
अब इस से क्या तुम्हें था या उमीद-वार न था
बेख़ुद देहलवी
आशिक़ समझ रहे हैं मुझे दिल लगी से आप
बेख़ुद देहलवी
आशिक़ हैं मगर इश्क़ नुमायाँ नहीं रखते
बेख़ुद देहलवी
आ गए फिर तिरे अरमान मिटाने हम को
बेख़ुद देहलवी
उन की हसरत भी नहीं मैं भी नहीं दिल भी नहीं
बेखुद बदायुनी
यूँही रहा जो बुतों पर निसार दिल मेरा
बेखुद बदायुनी
उन को दिमाग़-ए-पुर्सिश-ए-अहल-ए-मेहन कहाँ
बेखुद बदायुनी
साथ साथ अहल-ए-तमन्ना का वो मुज़्तर जाना
बेखुद बदायुनी
पयाम ले के जो पैग़ाम-बर रवाना हुआ
बेखुद बदायुनी
नाले में कभी असर न आया
बेखुद बदायुनी
क्यूँ मिरा हाल क़िस्सा-ख़्वाँ से सुनो
बेखुद बदायुनी
जिस में सौदा नहीं वो सर ही नहीं
बेखुद बदायुनी
इस बज़्म में न होश रहेगा ज़रा मुझे
बेखुद बदायुनी
गर्दिश-ए-चश्म-ए-यार ने मारा
बेखुद बदायुनी
दर्द-ए-दिल में कमी न हो जाए
बेखुद बदायुनी