Sad Poetry (page 173)

बहुत ज़ोरों पे वी-सी-आर था कल शब जहाँ मैं था

बेदिल जौनपूरी

ये दिल जो मुज़्तरिब रहता बहुत है

बेदिल हैदरी

जितना हंगामा ज़ियादा होगा

बेदिल हैदरी

ये दिल जो मुज़्तरिब रहता बहुत है

बेदिल हैदरी

रहने दे रतजगों में परेशाँ मज़ीद उसे

बेदिल हैदरी

मिरी दास्तान-ए-अलम तो सुन कोई ज़लज़ला नहीं आएगा

बेदिल हैदरी

दिल कहीं भी नहीं लगता होगा

बेदिल हैदरी

दरिया ने कल जो चुप का लिबादा पहन लिया

बेदिल हैदरी

अन-कही को कही बनाना है

बेदिल हैदरी

तुम जो चाहो तो मिरे दर्द का दरमाँ हो जाए

बेदम शाह वारसी

मिरे दर्द-ए-निहाँ का हाल मोहताज-ए-बयाँ क्यूँ हो

बेदम शाह वारसी

हमारी ज़िंदगी तो मुख़्तसर सी इक कहानी थी

बेदम शाह वारसी

बेदम ये मोहब्बत है या कोई मुसीबत है

बेदम शाह वारसी

ऐ जुनूँ क्यूँ लिए जाता है बयाबाँ में मुझे

बेदम शाह वारसी

ये ख़ुसरवी-ओ-शौकत-ए-शाहाना मुबारक

बेदम शाह वारसी

उस को दुनिया और न उक़्बा चाहिए

बेदम शाह वारसी

तुम ख़फ़ा हो तो अच्छा ख़फ़ा हो

बेदम शाह वारसी

तेरी उल्फ़त शोबदा-पर्वाज़ है

बेदम शाह वारसी

सीने में दिल है दिल में दाग़ दाग़ में सोज़-ओ-साज़-ए-इश्क़

बेदम शाह वारसी

शादी ओ अलम सब से हासिल है सुबुकदोशी

बेदम शाह वारसी

सहारा मौजों का ले ले के बढ़ रहा हूँ मैं

बेदम शाह वारसी

क़स्र-ए-जानाँ तक रसाई हो किसी तदबीर से

बेदम शाह वारसी

क़फ़स की तीलियों से ले के शाख़-ए-आशियाँ तक है

बेदम शाह वारसी

पर्दे उठे हुए भी हैं उन की इधर नज़र भी है

बेदम शाह वारसी

पहले शर्मा के मार डाला

बेदम शाह वारसी

न तो अपने घर में क़रार है न तिरी गली में क़याम है

बेदम शाह वारसी

न सुनो मेरे नाले हैं दर्द-भरे दार-ओ-असरे आह-ए-सहरे

बेदम शाह वारसी

न मेहराब-ए-हरम समझे न जाने ताक़-ए-बुत-ख़ाना

बेदम शाह वारसी

न कुनिश्त ओ कलीसा से काम हमें दर-ए-दैर न बैत-ए-हरम से ग़रज़

बेदम शाह वारसी

मुझ से छुप कर मिरे अरमानों को बर्बाद न कर

बेदम शाह वारसी