Sad Poetry (page 175)
बख़्त क्या जाने भला या कि बुरा होता है
बेबाक भोजपुरी
बड़ी दिल-शिकन है रह-ए-सफ़र कोई हम-सफ़र है न यार है
बेबाक भोजपुरी
तिरा कुश्ता उठाया अक़रबा ने
बयान यज़दानी
झोंके आते हैं बू-ए-उल्फ़त के
बयान यज़दानी
याद में ख़्वाब में तसव्वुर में
बयान मेरठी
ये मैं कहूँगा फ़लक पे जा कर ज़मीं से आया हूँ तंग आ कर
बयान मेरठी
वो दरिया-बार अश्कों की झड़ी है
बयान मेरठी
सुब्ह क़यामत आएगी कोई न कह सका कि यूँ
बयान मेरठी
सर-ए-शोरीदा पा-ए-दश्त-ए-पैमा शाम-ए-हिज्राँ था
बयान मेरठी
मिस्ल-ए-हुबाब-ए-बहर न इतना उछल के चल
बयान मेरठी
लहू टपका किसी की आरज़ू से
बयान मेरठी
ख़ूँ बहाने के हैं हज़ार तरीक़
बयान मेरठी
ख़ाक करती है ब-रंग-ए-चर्ख़-ए-नीली-फ़ाम रक़्स
बयान मेरठी
ग़म्ज़ा-ए-मा'शूक़ मुश्ताक़ों को दिखलाती है तेग़
बयान मेरठी
ऐ जुनूँ हाथ के चलते ही मचल जाऊँगा
बयान मेरठी
आएँगे गर उन्हें ग़ैरत होगी
बयान मेरठी
ज़ुल्फ़ तेरी ने परेशाँ किया ऐ यार मुझे
बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान
ये ख़ूब-रू न छुरी ने कटार रखते हैं
बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान
पूछता कौन है डरता है तू ऐ यार अबस
बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान
मैं तिरे डर से रो नहीं सकता
बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान
ले के दिल उस शोख़ ने इक दाग़ सीने पर दिया
बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान
कहता है कौन हिज्र मुझे सुब्ह ओ शाम हो
बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान
जा कहे कू-ए-यार में कोई
बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान
इश्वा है नाज़ है ग़म्ज़ा है अदा है क्या है
बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान
ज़ब्त-ए-ग़म कर भी लिया तो क्या किया
बासित भोपाली
उन का बर्बाद-ए-करम कहने के क़ाबिल हो गया
बासित भोपाली
शौक़ को बे-अदब किया इश्क़ को हौसला दिया
बासित भोपाली
सब काएनात-ए-हुस्न का हासिल लिए हुए
बासित भोपाली
नहीं ये जल्वा-हा-ए-राज़-ए-इरफ़ाँ देखने वाले
बासित भोपाली
मोहब्बत की इंतिहा चाहता हूँ
बासित भोपाली