Sad Poetry (page 192)
सेल्फ-पोर्ट्रेट
अज़रा अब्बास
नहीं
अज़रा अब्बास
लफ़्ज़ों का ज़वाल
अज़रा अब्बास
कहें से कोई नुक़्ता आ जाए
अज़रा अब्बास
हम दोनों
अज़रा अब्बास
फ़ीमेल बुल-फ़ाइटर
अज़रा अब्बास
एक नज़्म रोज़ आती है
अज़रा अब्बास
अँधेरा
अज़रा अब्बास
आख़िरी रूसूमात के दौरान
अज़रा अब्बास
वतन
अज़मतुल्लाह ख़ाँ
प्यारा प्यारा घर अपना
अज़मतुल्लाह ख़ाँ
ज़िंदगी मेरी मुझे क़ैद किए देती है
अज़्म शाकरी
सारे दुख सो जाएँगे लेकिन इक ऐसा ग़म भी है
अज़्म शाकरी
अगर साए से जल जाने का इतना ख़ौफ़ था तो फिर
अज़्म शाकरी
आँसुओं से लिख रहे हैं बेबसी की दास्ताँ
अज़्म शाकरी
ये मत कहो कि भीड़ में तन्हा खड़ा हूँ मैं
अज़्म शाकरी
तीरगी में सुब्ह की तनवीर बन जाएँगे हम
अज़्म शाकरी
शब की आग़ोश में महताब उतारा उस ने
अज़्म शाकरी
ख़ून आँसू बन गया आँखों में भर जाने के ब'अद
अज़्म शाकरी
ख़ाक उड़ाते हुए ये म'अरका सर करना है
अज़्म शाकरी
घर में चाँदी के कोई सोने के दर रख जाएगा
अज़्म शाकरी
दरीदा-पैरहनों में शुमार हम भी हैं
अज़्म शाकरी
अपने दुख-दर्द का अफ़्साना बना लाया हूँ
अज़्म शाकरी
अगर दश्त-ए-तलब से दश्त-ए-इम्कानी में आ जाते
अज़्म शाकरी
दरिया पार उतरने वाले ये भी जान नहीं पाए
अज़्म बहज़ाद
अजब महफ़िल है सब इक दूसरे पर हँस रहे हैं
अज़्म बहज़ाद
वुसअत-ए-चश्म को अंदोह-ए-बसारत लिक्खा
अज़्म बहज़ाद
वुसअत-ए-चश्म को अंदोह-ए-बसारत लिख्खा
अज़्म बहज़ाद
उस आँख से वहशत की तासीर उठा लाया
अज़्म बहज़ाद
शाम आई तो कोई ख़ुश-बदनी याद आई
अज़्म बहज़ाद