Sad Poetry (page 194)
इतने नज़दीक से आईने को देखा न करो
अज़ीज़ वारसी
इक हम कि उन के वास्ते महव-ए-फ़ुग़ाँ रहे
अज़ीज़ वारसी
दिल में हमारे अब कोई अरमाँ नहीं रहा
अज़ीज़ वारसी
आख़िर-ए-शब वो तेरी अंगड़ाई
अज़ीज़ वारसी
ये ग़म नहीं कि मुझ को जागना पड़ा है उम्र भर
अज़ीज़ तमन्नाई
याद
अज़ीज़ तमन्नाई
तसमा-ए-पा
अज़ीज़ तमन्नाई
क़िस्सा-ए-दर्द
अज़ीज़ तमन्नाई
मेरी आहट
अज़ीज़ तमन्नाई
हयूला
अज़ीज़ तमन्नाई
हर आईना इक अक्स-ए-नौ ढूँडता है
अज़ीज़ तमन्नाई
चाँदनी रात में
अज़ीज़ तमन्नाई
यूँही कटे न रहगुज़र-ए-मुख़्तसर कहीं
अज़ीज़ तमन्नाई
उठा के मेरे ज़ेहन से शबाब कोई ले गया
अज़ीज़ तमन्नाई
उसी ने साथ दिया ज़िंदगी की राहों में
अज़ीज़ तमन्नाई
उफ़ुक़ के उस पार कर रहा है कोई मिरा इंतिज़ार शायद
अज़ीज़ तमन्नाई
पाते हैं कुछ कमी सी तस्वीर-ए-ज़िंदगी में
अज़ीज़ तमन्नाई
ख़ल्वत हुई है अंजुमन-आरा कभी कभी
अज़ीज़ तमन्नाई
जिस को चलना है चले रख़्त-ए-सफ़र बाँधे हुए
अज़ीज़ तमन्नाई
दिल में वो दर्द उठा रात कि हम सो न सके
अज़ीज़ तमन्नाई
दहर में इक तिरे सिवा क्या है
अज़ीज़ तमन्नाई
बढ़ने दे अभी कशमकश-ए-तार-ए-नफ़स और
अज़ीज़ तमन्नाई
रसूल-ए-काज़िब
अज़ीज़ क़ैसी
रफ़्तगाँ
अज़ीज़ क़ैसी
मैं!
अज़ीज़ क़ैसी
मैं वफ़ा का सौदागर
अज़ीज़ क़ैसी
कावाक
अज़ीज़ क़ैसी
ग़रीब शहर
अज़ीज़ क़ैसी
फ़स्ल-ए-राएगाँ
अज़ीज़ क़ैसी
दाद-गर
अज़ीज़ क़ैसी