Sad Poetry (page 196)
ख़ाक चेहरे पे मल रहा हूँ मैं
अज़ीज़ नबील
जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी
अज़ीज़ नबील
हयात-ओ-काएनात पर किताब लिख रहे थे हम
अज़ीज़ नबील
दश्त-ओ-सहरा में समुंदर में सफ़र है मेरा
अज़ीज़ नबील
बातों में बहुत गहराई है, लहजे में बड़ी सच्चाई है
अज़ीज़ नबील
अगरचे ज़ेहन के कश्कोल से छलक रहे थे
अज़ीज़ नबील
आँखों के ग़म-कदों में उजाले हुए तो हैं
अज़ीज़ नबील
आएँगे नज़र सुब्ह के आसार में हम लोग
अज़ीज़ नबील
ये तेरी आरज़ू में बढ़ी वुसअत-ए-नज़र
अज़ीज़ लखनवी
उदासी अब किसी का रंग जमने ही नहीं देती
अज़ीज़ लखनवी
तुम ने छेड़ा तो कुछ खुले हम भी
अज़ीज़ लखनवी
तह में दरिया-ए-मोहब्बत के थी क्या चीज़ 'अज़ीज़'
अज़ीज़ लखनवी
सोज़-ए-ग़म से अश्क का एक एक क़तरा जल गया
अज़ीज़ लखनवी
क़फ़स में जी नहीं लगता है आह फिर भी मिरा
अज़ीज़ लखनवी
पैदा वो बात कर कि तुझे रोएँ दूसरे
अज़ीज़ लखनवी
मुसीबत थी हमारे ही लिए क्यूँ
अज़ीज़ लखनवी
मुझ को का'बा में भी हमेशा शैख़
अज़ीज़ लखनवी
हिज्र की रात काटने वाले
अज़ीज़ लखनवी
हक़ारत से न देखो साकिनान-ए-ख़ाक की बस्ती
अज़ीज़ लखनवी
हाए क्या चीज़ थी जवानी भी
अज़ीज़ लखनवी
हादसात-ए-दहर में वाबस्ता-ए-अर्बाब-ए-दर्द
अज़ीज़ लखनवी
दिल समझता था कि ख़ल्वत में वो तन्हा होंगे
अज़ीज़ लखनवी
'मीर'
अज़ीज़ लखनवी
लज़्ज़त-ए-ग़म
अज़ीज़ लखनवी
बचपने की याद
अज़ीज़ लखनवी
आतिश-ए-ख़ामोश
अज़ीज़ लखनवी
ये ग़लत है ऐ दिल-ए-बद-गुमाँ कि वहाँ किसी का गुज़र नहीं
अज़ीज़ लखनवी
वो निगाहें क्या कहूँ क्यूँ कर रग-ए-जाँ हो गईं
अज़ीज़ लखनवी
वाइज़ बुतान-ए-दैर से नफ़रत न कीजिए
अज़ीज़ लखनवी
तिरी कोशिश हम ऐ दिल सई-ए-ला-हासिल समझते हैं
अज़ीज़ लखनवी