Sad Poetry (page 197)

सामने आइना था मस्ती थी

अज़ीज़ लखनवी

साफ़ बातिन देर से हैं मुंतज़िर

अज़ीज़ लखनवी

रस्म ऐसों से बढ़ाना ही न था

अज़ीज़ लखनवी

न हुई हम से शब बसर न हुई

अज़ीज़ लखनवी

मुसीबत थी हमारे ही लिए क्यूँ

अज़ीज़ लखनवी

क्यूँ न हो शौक़ तिरे दर पे जबीं-साई का

अज़ीज़ लखनवी

कुछ हिसाब ऐ सितम ईजाद तो कर

अज़ीज़ लखनवी

कर चुके बर्बाद दिल को फ़िक्र क्या अंजाम की

अज़ीज़ लखनवी

काम दुनिया में बहुत करना है

अज़ीज़ लखनवी

जो यहाँ महव-ए-मा-सिवा न हुआ

अज़ीज़ लखनवी

जीते हैं कैसे ऐसी मिसालों को देखिए

अज़ीज़ लखनवी

जीते हैं कैसे ऐसी मिसालों को देखिए

अज़ीज़ लखनवी

इंतिहा-ए-इश्क़ हो यूँ इश्क़ में कामिल बनो

अज़ीज़ लखनवी

हिज्र की रात याद आती है

अज़ीज़ लखनवी

एक ही ख़त में है क्या हाल जो मज़कूर नहीं

अज़ीज़ लखनवी

दुनिया को वलवला दिल-ए-नाशाद से हुआ

अज़ीज़ लखनवी

दिल हमारा है कि हम माइल-ए-फ़रियाद नहीं

अज़ीज़ लखनवी

दिल आया इस तरह आख़िर फ़रे‌‌‌‌ब-ए-साज़-ओ-सामाँ में

अज़ीज़ लखनवी

देख कर हर दर-ओ-दीवार को हैराँ होना

अज़ीज़ लखनवी

चश्म-ए-साक़ी का तसव्वुर बज़्म में काम आ गया

अज़ीज़ लखनवी

चारागर चुप हैं क्यूँ इलाज करें

अज़ीज़ लखनवी

भड़क उट्ठेंगे शो'ले एक दिन दुनिया की महफ़िल में

अज़ीज़ लखनवी

बाज़ी-ए-इश्क़ मरे बैठे हैं

अज़ीज़ लखनवी

ऐ दिल ये है ख़िलाफ़-ए-रस्म-ए-वफ़ा-परस्ती

अज़ीज़ लखनवी

नाले हैं न आहें हैं न रोना न तड़पना

अज़ीज़ हैदराबादी

मुश्किल है इमतियाज़-ए-अज़ाब-ओ-सवाब में

अज़ीज़ हैदराबादी

गिन रहा हूँ हर्फ़ उन के अहद के

अज़ीज़ हैदराबादी

दिल ठिकाने हो तो सब कुछ है अज़ीज़

अज़ीज़ हैदराबादी

दर्द सहने के लिए सदमे उठाने के लिए

अज़ीज़ हैदराबादी

आराम अपने बस का है बस मैं नहीं है किया

अज़ीज़ हैदराबादी