Sad Poetry (page 214)
आवारा
असरार-उल-हक़ मजाज़
आज की रात
असरार-उल-हक़ मजाज़
आज भी
असरार-उल-हक़ मजाज़
आहंग-ए-नौ
असरार-उल-हक़ मजाज़
यूँही बैठे रहो बस दर्द-ए-दिल से बे-ख़बर हो कर
असरार-उल-हक़ मजाज़
ये मेरी दुनिया ये मेरी हस्ती
असरार-उल-हक़ मजाज़
ये जहाँ बारगह-ए-रित्ल-ए-गिराँ है साक़ी
असरार-उल-हक़ मजाज़
तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए
असरार-उल-हक़ मजाज़
शौक़ के हाथों ऐ दिल-ए-मुज़्तर क्या होना है क्या होगा
असरार-उल-हक़ मजाज़
साक़ी-ए-गुलफ़ाम बा-सद एहतिमाम आ ही गया
असरार-उल-हक़ मजाज़
रह-ए-शौक़ से अब हटा चाहता हूँ
असरार-उल-हक़ मजाज़
परतव-ए-साग़र-ए-सहबा क्या था
असरार-उल-हक़ मजाज़
नहीं ये फ़िक्र कोई रहबर-ए-कामिल नहीं मिलता
असरार-उल-हक़ मजाज़
न हम-आहंग-ए-मसीहा न हरीफ़-ए-जिब्रील
असरार-उल-हक़ मजाज़
मिरी वफ़ा का तिरा लुत्फ़ भी जवाब नहीं
असरार-उल-हक़ मजाज़
कुछ तुझ को ख़बर है हम क्या क्या ऐ शोरिश-ए-दौराँ भूल गए
असरार-उल-हक़ मजाज़
ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई
असरार-उल-हक़ मजाज़
ख़ामुशी का तो नाम होता है
असरार-उल-हक़ मजाज़
जुनून-ए-शौक़ अब भी कम नहीं है
असरार-उल-हक़ मजाज़
जिगर और दिल को बचाना भी है
असरार-उल-हक़ मजाज़
हुस्न को बे-हिजाब होना था
असरार-उल-हक़ मजाज़
दर्द की दौलत-ए-बेदार अता हो साक़ी
असरार-उल-हक़ मजाज़
दामन-ए-दिल पे नहीं बारिश-ए-इल्हाम अभी
असरार-उल-हक़ मजाज़
बस इस तक़्सीर पर अपने मुक़द्दर में है मर जाना
असरार-उल-हक़ मजाज़
अक़्ल की सतह से कुछ और उभर जाना था
असरार-उल-हक़ मजाज़
आशिक़ी जाँ-फ़ज़ा भी होती है
असरार-उल-हक़ मजाज़
आओ अब मिल के गुलिस्ताँ को गुल्सिताँ कर दें
असरार-उल-हक़ मजाज़
ठहरे तो कहाँ ठहरे आख़िर मिरी बीनाई
असरारुल हक़ असरार
सीना-ए-संग में ढूँढता है गुदाज़
असरारुल हक़ असरार
कुछ तो मायूस दिल तेरे बस में भी है
असरारुल हक़ असरार