Sad Poetry (page 226)
कहाँ खो गए मेरे ग़म-ख़्वार अब
असग़र शमीम
बात कुछ भी न थी क्यूँ ख़फ़ा हो गया
असग़र शमीम
इक शख़्स अपने हाथ की तहरीर दे गया
असग़र राही
अपने घर में मिरी तस्वीर सजाने वाले
असग़र राही
ज़िंदगी मौत का आईना
असग़र नदीम सय्यद
मोहब्बत की नज़्म
असग़र नदीम सय्यद
मेरे दिल में जंगल है
असग़र नदीम सय्यद
जब हम दोनों जुदा हुए थे
असग़र नदीम सय्यद
दिल जारी है
असग़र नदीम सय्यद
धूप-भरी अजरक
असग़र नदीम सय्यद
अभी कुछ दिन लगेंगे
असग़र नदीम सय्यद
बच्चे खुली फ़ज़ा में कहाँ तक निकल गए
असग़र मेहदी होश
सराए
असग़र मेहदी होश
ना-गुज़ीर
असग़र मेहदी होश
हुसैन
असग़र मेहदी होश
घरौंदे
असग़र मेहदी होश
ये तो सच है कि टूटे फूटे हैं
असग़र मेहदी होश
फूल पत्थर की चटानों पे खिलाएँ हम भी
असग़र मेहदी होश
मोहब्बत कर के शर्मिंदा नहीं हूँ
असग़र मेहदी होश
मेरा बचपन ही मुझे याद दिलाने आए
असग़र मेहदी होश
काम कुछ तो लेना था अपने दीदा-ए-तर से
असग़र मेहदी होश
जो सज़ा चाहो मोहब्बत से दो यारो मुझ को
असग़र मेहदी होश
जला जला के दिए पास पास रखते हैं
असग़र मेहदी होश
इतना एहसास तो दे पालने वाले मुझ को
असग़र मेहदी होश
बाहर का माहौल तो हम को अक्सर अच्छा लगता है
असग़र मेहदी होश
बचपन तमाम बूढ़े सवालों में कट गया
असग़र मेहदी होश
हम दश्त से हर शाम यही सोच के घर आए
असग़र गोरखपुरी
आँखों की नदी सूख गई फिर भी हरा है
असग़र गोरखपुरी
ज़ाहिद ने मिरा हासिल-ए-ईमाँ नहीं देखा
असग़र गोंडवी
ये भी फ़रेब से हैं कुछ दर्द आशिक़ी के
असग़र गोंडवी