Sad Poetry (page 227)
रूदाद-ए-चमन सुनता हूँ इस तरह क़फ़स में
असग़र गोंडवी
पहली नज़र भी आप की उफ़ किस बला की थी
असग़र गोंडवी
माइल-ए-शेर-ओ-ग़ज़ल फिर है तबीअत 'असग़र'
असग़र गोंडवी
लोग मरते भी हैं जीते भी हैं बेताब भी हैं
असग़र गोंडवी
क्या क्या हैं दर्द-ए-इश्क़ की फ़ित्ना-तराज़ियाँ
असग़र गोंडवी
जीना भी आ गया मुझे मरना भी आ गया
असग़र गोंडवी
छुट जाए अगर दामन-ए-कौनैन तो क्या ग़म
असग़र गोंडवी
बना लेता है मौज-ए-ख़ून-ए-दिल से इक चमन अपना
असग़र गोंडवी
ऐ शैख़ वो बसीत हक़ीक़त है कुफ़्र की
असग़र गोंडवी
आलाम-ए-रोज़गार को आसाँ बना दिया
असग़र गोंडवी
यूँ न मायूस हो ऐ शोरिश-ए-नाकाम अभी
असग़र गोंडवी
ये क्या कहा कि ग़म-ए-इश्क़ नागवार हुआ
असग़र गोंडवी
ये इश्क़ ने देखा है ये अक़्ल से पिन्हाँ है
असग़र गोंडवी
वो नग़्मा बुलबुल-ए-रंगीं-नवा इक बार हो जाए
असग़र गोंडवी
तू एक नाम है मगर सदा-ए-ख़्वाब की तरह
असग़र गोंडवी
तिरे जल्वों के आगे हिम्मत-ए-शरह-ओ-बयाँ रख दी
असग़र गोंडवी
सिर्फ़ इक सोज़ तो मुझ में है मगर साज़ नहीं
असग़र गोंडवी
शिकवा न चाहिए कि तक़ाज़ा न चाहिए
असग़र गोंडवी
सामने उन के तड़प कर इस तरह फ़रियाद की
असग़र गोंडवी
रक़्स-ए-मस्ती देखते जोश-ए-तमन्ना देखते
असग़र गोंडवी
पाता नहीं जो लज़्ज़त-ए-आह-ए-सहर को मैं
असग़र गोंडवी
पास-ए-अदब में जोश-ए-तमन्ना लिए हुए
असग़र गोंडवी
मौजों का अक्स है ख़त-ए-जाम-ए-शराब में
असग़र गोंडवी
मता-ए-ज़ीस्त क्या हम ज़ीस्त का हासिल समझते हैं
असग़र गोंडवी
मस्ती में फ़रोग़-ए-रुख़-ए-जानाँ नहीं देखा
असग़र गोंडवी
मजाज़ कैसा कहाँ हक़ीक़त अभी तुझे कुछ ख़बर नहीं है
असग़र गोंडवी
मय-ए-बे-रंग का सौ रंग से रुस्वा होना
असग़र गोंडवी
कोई महमिल-नशीं क्यूँ शाद या नाशाद होता है
असग़र गोंडवी
ख़ुदा जाने कहाँ है 'असग़र'-ए-दीवाना बरसों से
असग़र गोंडवी
जो नक़्श है हस्ती का धोका नज़र आता है
असग़र गोंडवी