Sad Poetry (page 228)

जान-ए-नशात हुस्न की दुनिया कहें जिसे

असग़र गोंडवी

इश्वों की है न उस निगह-ए-फ़ित्ना-ज़ा की है

असग़र गोंडवी

इश्क़ है इक कैफ़-ए-पिन्हानी मगर रंजूर है

असग़र गोंडवी

हुस्न को वुसअतें जो दीं इश्क़ को हौसला दिया

असग़र गोंडवी

है दिल-ए-नाकाम-ए-आशिक़ में तुम्हारी याद भी

असग़र गोंडवी

गुम कर दिया है दीद ने यूँ सर-ब-सर मुझे

असग़र गोंडवी

गर्म-ए-तलाश-ओ-जुस्तुजू अब है तिरी नज़र कहाँ

असग़र गोंडवी

असरार-ए-इश्क़ है दिल-ए-मुज़्तर लिए हुए

असग़र गोंडवी

अक्स किस चीज़ का आईना-ए-हैरत में नहीं

असग़र गोंडवी

आशोब-ए-हुस्न की भी कोई दास्ताँ रहे

असग़र गोंडवी

आलाम-ए-रोज़गार को आसाँ बना दिया

असग़र गोंडवी

सीम-तन गुल-रुख़ों की बस्ती है

असग़र आबिद

बात बे-बात उलझते हो भला बात है क्या

असग़र आबिद

जाने लगे हैं अब दम-ए-सर्द आसमाँ तलक

असीर लखनवी

तुम्हारी याद में दुनिया को हूँ भुलाए हुए

असर सहबाई

सज्दे के दाग़ से न हुई आश्ना जबीं

असर सहबाई

ख़ुदा की देन है जिस को नसीब हो जाए

असर सहबाई

आह क्या क्या आरज़ूएँ नज़्र-ए-हिरमाँ हो गईं

असर सहबाई

रुमूज़-ए-मोहब्बत

असर सहबाई

ज़ुल्मत-ए-दश्त-ए-अदम में भी अगर जाऊँगा

असर सहबाई

तुम्हारी याद में दुनिया को हूँ भुलाए हुए

असर सहबाई

तुम्हारी फ़ुर्क़त में मेरी आँखों से ख़ूँ के आँसू टपक रहे हैं

असर सहबाई

मिरी हर साँस को सब नग़्मा-ए-महफ़िल समझते हैं

असर सहबाई

लुत्फ़ गुनाह में मिला और न मज़ा सवाब में

असर सहबाई

वो उन का हिजाब और नज़ाकत के नज़ारे

असर रामपुरी

वो जो नहीं हैं बज़्म में बज़्म की शान भी नहीं

असर रामपुरी

कुछ देर फ़िक्र आलम-ए-बाला की छोड़ दो

असर लखनवी

भूलने वाले को शायद याद वादा आ गया

असर लखनवी

तस्कीन-ए-दिल को अश्क-ए-अलम क्या बहाऊँ मैं

असर लखनवी

सहरा से चले हैं सू-ए-गुलशन

असर लखनवी