Sad Poetry (page 230)
जाऊँ कहाँ शुऊ'र-ए-हुनर किस के पास है
असद जाफ़री
जब तक वो शो'ला-रू मिरे पेश-ए-नज़र न था
असद जाफ़री
न आया ग़म भी मोहब्बत में साज़गार मुझे
असद भोपाली
मैं अब तेरे सिवा किस को पुकारूँ
असद भोपाली
इतना तो बता जाओ ख़फ़ा होने से पहले
असद भोपाली
देखिए अहद-ए-वफ़ा अच्छा नहीं
असद भोपाली
तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा
असद भोपाली
न साथी है न मंज़िल का पता है
असद भोपाली
कुछ भी हो वो अब दिल से जुदा हो नहीं सकते
असद भोपाली
जब ज़िंदगी सुकून से महरूम हो गई
असद भोपाली
गिराँ गुज़रने लगा दौर-ए-इंतिज़ार मुझे
असद भोपाली
ग़म-ए-हयात से जब वास्ता पड़ा होगा
असद भोपाली
दो-जहाँ से मावरा हो जाएगा
असद भोपाली
पुराने घर की शिकस्ता छतों से उकता कर
असअ'द बदायुनी
परिंद पेड़ से परवाज़ करते जाते हैं
असअ'द बदायुनी
परिंद क्यूँ मिरी शाख़ों से ख़ौफ़ खाते हैं
असअ'द बदायुनी
मिरे बदन पे ज़मानों की ज़ंग है लेकिन
असअ'द बदायुनी
जिसे पढ़ते तो याद आता था तेरा फूल सा चेहरा
असअ'द बदायुनी
जिसे न मेरी उदासी का कुछ ख़याल आया
असअ'द बदायुनी
बिछड़ के तुझ से किसी दूसरे पे मरना है
असअ'द बदायुनी
ये जो शाम ज़र-निगार है
असअ'द बदायुनी
तल्ख़ियाँ
असअ'द बदायुनी
जो लोग रातों को जागते थे
असअ'द बदायुनी
हम अहल-ए-ख़ौफ़
असअ'द बदायुनी
एक नज़्म
असअ'द बदायुनी
यही नहीं कि मिरा घर बदलता जाता है
असअ'द बदायुनी
वो एक नाम जो दरिया भी है किनारा भी
असअ'द बदायुनी
वक़्त इक दरिया है दरिया सब बहा ले जाएगा
असअ'द बदायुनी
उस अब्र से भी क़बाहत ज़ियादा होती है
असअ'द बदायुनी
सुख़न-वरी का बहाना बनाता रहता हूँ
असअ'द बदायुनी