Sad Poetry (page 229)
निगह-ए-शौक़ को यूँ आइना-सामानी दे
असर लखनवी
नवेद-ए-वस्ल-ए-यार आए न आए
असर लखनवी
न शरह-ए-शौक़ न तस्कीन जान-ए-ज़ार में है
असर लखनवी
किस तरह खिलते हैं नग़्मों के चमन समझा था मैं
असर लखनवी
हिजाब-ए-रंग-ओ-बू है और मैं हूँ
असर लखनवी
हाए रे प्यारी प्यारी आँख
असर लखनवी
दिल गया बे-क़रारियाँ न गईं
असर लखनवी
भूले अफ़्साने वफ़ा के याद दिल्वाते हुए
असर लखनवी
बहार है तिरे आरिज़ से लौ लगाए हुए
असर लखनवी
अश्क-ए-गुल-रंग निसार-ए-ग़म-ए-जानाना करें
असर लखनवी
आप बिक जाए कोई ऐसा ख़रीदार न था
असर लखनवी
आह से जब दिल में डूबे तीर उभारे जाएँगे
असर लखनवी
उल्फ़त के बदले उन से मिला दर्द-ए-ला-इलाज
असर अकबराबादी
उल्फ़त का है मज़ा कि 'असर' ग़म भी साथ हों
असर अकबराबादी
कितना मुश्किल है ख़ुद-बख़ुद रोना
असर अकबराबादी
हम हुए दश्त-ए-नवर्द फिर भी न देखा तुझ को
असर अकबराबादी
है अजब सी कश्मकश दिल में 'असर'
असर अकबराबादी
फ़िक्र-ए-जहान दर्द-ए-मोहब्बत फ़िराक़-ए-यार
असर अकबराबादी
कोई हमदम बना के देखो तुम
असर अकबराबादी
जाने क्यूँ लोग ग़म से डरते हैं
असर अकबराबादी
सीनों में अगर होती कुछ प्यार की गुंजाइश
असद रज़ा
राहें धुआँ धुआँ हैं सफ़र गर्द गर्द है
असद रज़ा
हम से दीवानों को असरी आगही डसती रही
असद रज़ा
नौ मंज़िला बिल्डिंग
असद मोहम्मद ख़ाँ
हम-साई
असद जाफ़री
शश्दर-ओ-हैरान है जो भी ख़रीदारों में है
असद जाफ़री
मलाल-ए-हिज्र नहीं रंज-ए-बे-रुख़ी भी नहीं
असद जाफ़री
कोई दिल-जूई नहीं थी कोई शुनवाई न थी
असद जाफ़री
ख़याल यार मुझे जब लहू रुलाने लगा
असद जाफ़री
जो बज़्म-ए-दहर में कल तक थे ख़ुद-सरों की तरह
असद जाफ़री