Sad Poetry (page 224)
क़ैद-ए-हस्ती में हूँ अपने फ़र्ज़ की तामील तक
अश्क अमृतसरी
कश्मकश में हैं तिरी ज़ुल्फ़ों के ज़िंदानी हनूज़
अश्क अमृतसरी
बहुत ख़ामोश रह कर जो सदाएँ मुझ को देता था
आशिर वकील राव
याद रखना भी इक इबादत है
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
सवेरा ले के आता है मिरे ख़्वाबों की ताबीरें
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
इक लफ़्ज़ याद था मुझे तर्क-ए-वफ़ा मगर
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
ज़ख़्म-ए-फ़ुर्क़त को तिरी याद ने भरने न दिया
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
तीर-ए-नज़र ने आप की घाएल किया मुझे
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
सोचते हैं कि बुलबुला हो जाएँ
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
हीला है हवाला है
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
घटा जब रक़्स करती है तो उन की याद आती है
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
दिल मानता नहीं है मनाने के बअ'द भी
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
आ जाओ अब तो ज़ुल्फ़ परेशाँ किए हुए
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
ज़र्द पत्तों पे मिरा नाम लिखा है उस ने
अशफ़ाक़ अंजुम
मैं सोचता तो हूँ लेकिन ये बात किस से कहूँ
अशफ़ाक़ अंजुम
जिन लग़्ज़िशों के दहर में झंडे बुलंद हैं
अशफ़ाक़ रहबर
ग़म तो था फिर भी बे-शुमार न था
अशफ़ाक़ रहबर
ज़मीं पर नीम-जाँ यारी पड़ी है
अशफ़ाक़ रशीद मंसूरी
मिरी ग़ज़ल गुनगुना रहा था
अशफ़ाक़ रशीद मंसूरी
दुनिया को हादसों में गिरफ़्तार देखना
अशफ़ाक़ रशीद मंसूरी
दिमाग़-ओ-दिल में हलचल हो रही है
अशफ़ाक़ रशीद मंसूरी
वो शख़्स जिस की ख़ुशी का बाइस थीं मेरी बातें
अशफ़ाक़ नासिर
हिज्र इंसाँ के ख़द-ओ-ख़ाल बदल देता है
अशफ़ाक़ नासिर
याद रक्खेगा मिरा कौन फ़साना मिरे दोस्त
अशफ़ाक़ नासिर
ताएरों की उड़ान में हम हैं
अशफ़ाक़ नासिर
रंज जो दीदा-ए-नमनाक में देखा गया है
अशफ़ाक़ नासिर
मैं सीखता रहा इक उम्र हाव-हू करना
अशफ़ाक़ नासिर
दिल किसी ख़्वाहिश का उकसाया हुआ
अशफ़ाक़ नासिर
अजब तरह के कमाल करने भी आ गए हैं
अशफ़ाक़ नासिर
लफ़्ज़ों में हर इक रंज समोने का क़रीना
अशफ़ाक़ हुसैन