Sad Poetry (page 222)
दिल-गिरफ़्ता हूँ जहाँ-शाद हूँ मैं
आसिफ़ रज़ा
दिल और तरह आज तो घबराया हुआ है
आसिफ़ रज़ा
वो बे-हुनर हूँ कि है ज़िंदगी वबाल मुझे
अासिफ़ जमाल
सहरा से भी वीराँ मिरा घर है कि नहीं है
अासिफ़ जमाल
साए की तरह कोई मिरे साथ लगा था
अासिफ़ जमाल
मगर नहीं था फ़क़त 'मीर' ख़्वार मैं भी था
अासिफ़ जमाल
कैसी आशुफ़्तगी-ए-सर है यहाँ
अासिफ़ जमाल
दिल है कि हमें फिर से उधर ले के चला है
अासिफ़ जमाल
भूले हुए हैं सब कि है कार-ए-जहाँ बहुत
अासिफ़ जमाल
आँख बे-ख़्वाब हुई है कैसी
अासिफ़ जमाल
सदा-ए-क़ैस शौक़-ए-दश्त-पैमाई नमी-दानम
अासिफ़ अंजुम
रेत आँखों में भर गया दरिया
अासिफ़ अंजुम
कैसा तिलिस्म आज ये तारी है जिस्म में
अासिफ़ अंजुम
इक दिन ख़ुद को अपने अंदर फेंकूँगा
अासिफ़ अंजुम
भूल कर तू सारे ग़म अपने चमन में रक़्स कर
अासिफ़ अंजुम
एक तस्वीर हूँ ग़म की जिस पर
अशरफ़ यूसुफ़
तेरे आने का गुमाँ होता है
अशरफ़ यूसुफ़
दिए की आँख से जब गुफ़्तुगू नहीं होती
अशरफ़ यूसुफ़
निकली वो ज़िंदगी से तो पामाल हो गया
अशरफ़ शाद
तिरे बदन के नए ज़ाविए बनाता हुआ
अशरफ़ सलीम
अहद-ए-वफ़ा न याद दिलाएँ तो क्या करें
अशरफ़ रफ़ी
फ़लक से रोज़ उतरते हैं रौशनी के ख़ुतूत
अशरफ़ जावेद
बसीत-ए-दश्त की हुर्मत को बाम-ओ-दर दे दे
अशरफ़ जावेद
23-मार्च अज़ान-ए-सुब्ह-ए-नियाज़
अशरफ़ जावेद
गुल-ए-ख़ुर्शीद खिलाऊँगा चला जाऊँगा
अशरफ़ जावेद
बसीत-ए-दश्त की हुर्मत को बाम-ओ-दर दे दे
अशरफ़ जावेद
बदल के देख लिए ज़ाविए उड़ानों के
अशरफ़ जावेद
कब दर्द से दिल को ताब आया
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
दिल-बस्तगी क़फ़स से यहाँ तक हुई मुझे
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
उठ चुका दिल मिरा ज़माने से
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ