Sad Poetry (page 220)

अब यही सोचते रहते हैं बिछड़ कर तुझ से

आसिम वास्ती

वक़्त बे-वक़्त ये पोशाक मिरी ताक में है

आसिम वास्ती

तुम इंतिज़ार के लम्हे शुमार मत करना

आसिम वास्ती

तुम भटक जाओ तो कुछ ज़ौक़-ए-सफ़र आ जाएगा

आसिम वास्ती

सामने रह कर न होना मसअला मेरा भी है

आसिम वास्ती

मिस्र फ़िरऔन की तहवील में आया हुआ है

आसिम वास्ती

हर तरफ़ हद्द-ए-नज़र तक सिलसिला पानी का है

आसिम वास्ती

है नींद अभी आँख में पल भर में नहीं है

आसिम वास्ती

है मुस्तक़िल यही एहसास कुछ कमी सी है

आसिम वास्ती

एक आँसू में तिरे ग़म का अहाता करते

आसिम वास्ती

बनाई है तिरी तस्वीर मैं ने डरते हुए

आसिम वास्ती

अगर चुभती हुई बातों से डरना पड़ गया तो

आसिम वास्ती

वहशत में सू-ए-दश्त जो ये आह ले गई

आसिफ़ुद्दौला

तालिब हो वहाँ आन के क्या कोई सनम का

आसिफ़ुद्दौला

सीने में दाग़ है तपिश-ए-इंतिज़ार का

आसिफ़ुद्दौला

मिलने को तुझ से दिल तो मिरा बे-क़रार है

आसिफ़ुद्दौला

मिरे दिल को ज़ुल्फ़ों की ज़ंजीर कीजो

आसिफ़ुद्दौला

मर गया ग़म में तिरे हाए में रोता रोता

आसिफ़ुद्दौला

क्या फ़ाश करूँ ग़म-ए-निहाँ को

आसिफ़ुद्दौला

किस क़दर दर्द के शब करता था मज़कूर तिरा

आसिफ़ुद्दौला

जो शमशीर तेरी अलम देखते हैं

आसिफ़ुद्दौला

जिस दिन से यार मुझ से वो शोख़ आश्ना हुआ

आसिफ़ुद्दौला

जब से मेरे दिल में आ कर इश्क़ का थाना हुआ

आसिफ़ुद्दौला

ग़ैर पर लुत्फ़ करे हम पे सितम या क़िस्मत

आसिफ़ुद्दौला

दिल दिया जी दिया ख़फ़ा न किया

आसिफ़ुद्दौला

दाम-ए-उल्फ़त में फँसा दिल हाए दिल अफ़्सोस दिल

आसिफ़ुद्दौला

ज़िंदगी में तुझ को पाना आज तक भूला नहीं

अासिफ़ा ज़मानी

तुम से शिकवा भी नहीं कोई शिकायत भी नहीं

अासिफ़ा ज़मानी

घर को कैसा भी तुम सजा रखना

अासिफ़ा ज़मानी

दरयाफ़्त कर लिया है बसाया नहीं मुझे

अासिफ़ा निशात