Sad Poetry (page 221)
अपना घर बाज़ार में क्यूँ रख दिया
अासिफ़ा निशात
चंद लम्हे विसाल-मौसम के
अासिफ़ शफ़ी
ज़मीं कहीं है मिरी और आसमान कहीं
अासिफ़ शफ़ी
ये भी करना पड़ा मोहब्बत में
अासिफ़ शफ़ी
उम्र सारी तिरी चाहत में बितानी पड़ जाए
अासिफ़ शफ़ी
राह-ए-जुनूँ पे चल परे जीना मुहाल कर लिया
अासिफ़ शफ़ी
जमाल-ए-यार को तस्वीर करने वाले थे
अासिफ़ शफ़ी
एक यूसुफ़ के ख़रीदार हुए हैं हम लोग
अासिफ़ शफ़ी
दिल में वफ़ा की है तलब लब पे सवाल भी नहीं
अासिफ़ शफ़ी
और अब ये दिल भी मेरा मानता है
अासिफ़ शफ़ी
ऐ मुझे 'मीर' के अशआ'र सुनाने वाले
अासिफ़ शफ़ी
सीने के बीच 'साक़िब' ऐसा है मरना जीना
अासिफ़ साक़िब
क़ैदी रिहा हुए थे पहन कर नए लिबास
अासिफ़ साक़िब
दिल की मौजों की तड़प मेरी सदा में आए
अासिफ़ साक़िब
घात
अासिफ़ साक़िब
ओझल हुई नज़र से बे-बाल-ओ-पर गई है
अासिफ़ साक़िब
नुमू की ख़ाक से उट्ठेगा फिर लहू मेरा
अासिफ़ साक़िब
किसे मजाल जो टोके मिरी उड़ानों को
अासिफ़ साक़िब
ग़ज़ल में दर्द का जादू मुझी को होना था
अासिफ़ साक़िब
दिल की मौजों की तड़प मेरी सदा में आए
अासिफ़ साक़िब
बज़्म-ए-सुख़न को आप की दिल-गीर चल पड़े
अासिफ़ साक़िब
अजनबी मुझ से आ गले मिल ले
आसिफ़ रज़ा
ज़मीं की रात
आसिफ़ रज़ा
तलाश
आसिफ़ रज़ा
शायद
आसिफ़ रज़ा
माँ
आसिफ़ रज़ा
दूर की शहज़ादी
आसिफ़ रज़ा
ये मिरी बज़्म नहीं है लेकिन
आसिफ़ रज़ा
ये दिल में वसवसा क्या पल रहा है
आसिफ़ रज़ा
साहिल-ए-इंतिज़ार में तन्हा
आसिफ़ रज़ा