Sad Poetry (page 218)
वहाँ हर एक इसी नश्शा-ए-अना में है
असलम इमादी
तमाम खेल-तमाशों के दरमियान वही
असलम इमादी
कोशिश है गर उस की कि परेशान करेगा
असलम इमादी
कोई इशारा कोई इस्तिआ'रा क्यूँकर हो
असलम इमादी
ख़ुद अपनी चाल से ना-आश्ना रहे है कोई
असलम इमादी
दिल की धड़कन अब रग-ए-जाँ के बहुत नज़दीक है
असलम इमादी
लिबास-ए-गुल में वो ख़ुशबू के ध्यान से निकला
असलम बदर
दीवारों को दिल से बाहर रखने वाले
असलम बदर
रास्ता सुनसान था तो मुड़ के देखा क्यूँ नहीं
असलम आज़ाद
न दश्त ओ दर से अलग था न जंगलों से जुदा
असलम आज़ाद
किसी तरह न तिलिस्म-ए-सुकूत टूट सका
असलम आज़ाद
हमारे बीच वो चुप-चाप बैठा रहता है
असलम आज़ाद
ज़हर
असलम आज़ाद
आहट
असलम आज़ाद
यादों का लम्स ज़ेहन को छू कर गुज़र गया
असलम आज़ाद
वो क्या है कौन है ये तो ज़रा बता मुझ को
असलम आज़ाद
उड़ते लम्हों के भँवर में कोई फँसता ही नहीं
असलम आज़ाद
रास्ता सुनसान था तो मुड़ के देखा क्यूँ नहीं
असलम आज़ाद
कोई दीवार सलामत है न अब छत मेरी
असलम आज़ाद
किश्त-ए-दिल वीराँ सही तुख़्म-ए-हवस बोया नहीं
असलम आज़ाद
जगमगाती ख़्वाहिशों का नूर फैला रात भर
असलम आज़ाद
हर सू है तारीकी छाई तुम भी चुप और हम भी चुप
असलम आज़ाद
हमारी याद उन्हें आ गई तो क्या होगा
असलम आज़ाद
बस एक बार उसे रौशनी में देखा था
असलम आज़ाद
अजीब शख़्स है मुझ को तो वो दिवाना लगे
असलम आज़ाद
आँखों से मैं ने चख लिया मौसम के ज़हर को
असलम आज़ाद
ख़फ़ा न हो कि तिरा हुस्न ही कुछ ऐसा था
असलम अंसारी
मय-शिकस्ता-दिली ऐ हरीफ़-ए-ज़ौक़-ए-नुमू
असलम अंसारी
एक नज़्म
असलम अंसारी
ऐ ज़मिस्ताँ की हवा तेज़ न चल
असलम अंसारी