Sad Poetry (page 244)
रही रात उन से मुलाक़ात कम
अनवर शऊर
पियो कि मा-हसल-ए-होश किस ने देखा है
अनवर शऊर
न सह सकूँगा ग़म-ए-ज़ात गो अकेला मैं
अनवर शऊर
मैं ख़ाक हूँ आब हूँ हवा हूँ
अनवर शऊर
कुछ दिन तो कर तआ'वुन ऐ ख़ुश-सिफ़ात मुझ से
अनवर शऊर
जो सुनता हूँ कहूँगा मैं जो कहता हूँ सुनूँगा मैं
अनवर शऊर
जो जल उठी है शबिस्ताँ में याद सी क्या है
अनवर शऊर
इस में क्या शक है कि आवारा हूँ मैं
अनवर शऊर
हो गए दिन जिन्हें भुलाए हुए
अनवर शऊर
हवस बला की मोहब्बत हमें बला की है
अनवर शऊर
गो कठिन है तय करना उम्र का सफ़र तन्हा
अनवर शऊर
फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था
अनवर शऊर
बशारत हो कि अब मुझ सा कोई पागल न आएगा
अनवर शऊर
और न दर-ब-दर फिरा और न आज़मा मुझे
अनवर शऊर
ऐसे देखा है कि देखा ही न हो
अनवर शऊर
अगरचे आइना-ए-दिल में है क़याम उस का
अनवर शऊर
आवारा हूँ रैन-बसेरा कोई नहीं मेरा
अनवर शऊर
पागलों की मद्ह में
अनवर सेन रॉय
ब'अद-अज़-मर्ग
अनवर सेन रॉय
अपने लिए एक नौहा
अनवर सेन रॉय
वो पर्दे से निकल कर सामने जब बे-हिजाब आया
अनवर सहारनपुरी
रंगीं बना के दामन-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर को मैं
अनवर सहारनपुरी
क्यूँ ख़फ़ा हम से हो ख़ता क्या है
अनवर सहारनपुरी
जल्वे दिखाए यार ने अपनी हरीम-ए-नाज़ में
अनवर सहारनपुरी
जब फ़स्ल-ए-बहाराँ आती है शादाब गुलिस्ताँ होते हैं
अनवर सहारनपुरी
आबाद अब न होगा मय-ख़ाना ज़िंदगी का
अनवर सहारनपुरी
यूँ तसल्ली को तो इक याद भी काफ़ी थी मगर
अनवर सदीद
नया शहर
अनवर सदीद
तुझ को तो क़ुव्वत-ए-इज़हार ज़माने से मिली
अनवर सदीद
सियाहियों का नगर रौशनी से अट जाए
अनवर सदीद