Sad Poetry (page 245)
मौसम सर्द हवाओं का
अनवर सदीद
दीवार पर लिखा न पढ़ो और ख़ुश रहो
अनवर सदीद
आज़ादी के दीवाने
अनवर साबरी
ज़िंदगी के हसीं बहाने से
अनवर साबरी
वो नीची निगाहें वो हया याद रहेगी
अनवर साबरी
वक़्त जब करवटें बदलता है
अनवर साबरी
उन की महफ़िल में हमेशा से यही देखा रिवाज
अनवर साबरी
उम्र गुज़री है इल्तिजा करते
अनवर साबरी
तसव्वुर के सहारे यूँ शब-ए-ग़म ख़त्म की मैं ने
अनवर साबरी
तलख़ाबा-ए-ग़म ख़ंदा-जबीं हो के पिए जा
अनवर साबरी
शब-ए-फ़िराक़ की ज़ुल्मत है ना-गवार मुझे
अनवर साबरी
रहते हुए क़रीब जुदा हो गए हो तुम
अनवर साबरी
निगाह-ओ-दिल से गुज़री दास्ताँ तक बात जा पहुँची
अनवर साबरी
न तन्हा नस्तरीन ओ नस्तरन से इश्क़ है मुझ को
अनवर साबरी
न होंगे हम तो ये रंग-ए-गुलिस्ताँ कौन देखेगा
अनवर साबरी
मुद्दतों से कोई पैग़ाम नहीं आता है
अनवर साबरी
कुछ अबरुओं पे बल भी हैं ख़ंदा-लबी के साथ
अनवर साबरी
इश्क़ मुकम्मल ख़्वाब-ए-परेशाँ
अनवर साबरी
इश्क़ में ग़म के सिवा कोई ख़ुशी देखी नहीं
अनवर साबरी
इंक़िलाब-ए-सहर-ओ-शाम इलाही तौबा
अनवर साबरी
हासिल-ए-ग़म यही समझते हैं
अनवर साबरी
दौर-ए-हाज़िर हो गया है इस क़दर कम-आश्ना
अनवर साबरी
अता-ए-ग़म पे भी ख़ुश हूँ मिरी ख़ुशी क्या है
अनवर साबरी
तमसील
अनवर नदीम
मंज़िल-ए-शौक़
अनवर नदीम
कहीं और ही चलना होगा
अनवर नदीम
उसी अमल की ज़रा सी शराब देता चल
अनवर नदीम
शेर-ओ-सुख़न की उस महफ़िल में सब से छोटे हम ही थे
अनवर नदीम
क्या सुनाएँ तुम्हें कोई ताज़ा ग़ज़ल
अनवर नदीम
अकेला पा के मुझ को याद उन की आ तो जाती है
अनवर मिर्ज़ापुरी