Sad Poetry (page 247)
दुनिया भी अजब क़ाफ़िला-ए-तिश्ना-लबाँ है
अनवर मसूद
दरमियाँ गर न तिरा वादा-ए-फ़र्दा होता
अनवर मसूद
दर्द बढ़ता ही रहे ऐसी दवा दे जाओ
अनवर मसूद
बस यूँही इक वहम सा है वाक़िआ ऐसा नहीं
अनवर मसूद
अगले दिन कुछ ऐसे होंगे
अनवर मसूद
रद्द-ए-अमल
अनवर ख़ान
कहाँ तक मुझ को ठुकराएगी दुनिया
अनवर ख़ान
कहाँ तक दूर रह पाऊँगा ख़ुद से
अनवर ख़ान
ज़माना उफ़ ये कैसा हो रहा है
अनवर जमाल अनवर
दर्द-ए-दिल की दवा है माह-ए-नौ
अनवर जमाल अनवर
चढ़ते तूफ़ान को साहिल से गुज़रना था मियाँ
अनवर जमाल अनवर
बे-घर था फिर छोड़ गया घर जाने क्यूँ
अनवर जमाल अनवर
आए हैं समझाने लोग
अनवर जमाल अनवर
ज़ुल्फ़ को अब्र का टुकड़ा नहीं लिख्खा मैं ने
अनवर जलालपुरी
क़याम-गाह न कोई न कोई घर मेरा
अनवर जलालपुरी
मैं हर बे-जान हर्फ़-ओ-लफ़्ज़ को गोया बनाता हूँ
अनवर जलालपुरी
उस की सूरत उस की आँखें उस का चेहरा भूल गए
अनवार हबीब
उदासी एक लड़की है
अनवार फ़ितरत
उदासी एक लड़की है
अनवार फ़ितरत
तू भी ऐसा सोचती होगी
अनवार फ़ितरत
केंचुली बदलती रात
अनवार फ़ितरत
ग़ुस्सैला परिंदा एक दिन उसे खा जाएगा
अनवार फ़ितरत
दर्द उरूज पर आ जाए तो
अनवार फ़ितरत
ये दिल का कर्ब लबों तक कभी न आएगा
अनवार फ़िरोज़
शिकस्ता-पा ही सही दूर की सदा ही सही
अनवार फ़िरोज़
नज़र आए क्या मुझ से फ़ानी की सूरत
अनवर देहलवी
हर शय को इंतिहा है यक़ीं है कि वस्ल हो
अनवर देहलवी
'अनवर' ने बदले जान के ली जिंस-ए-दर्द-ए-दिल
अनवर देहलवी
यूसुफ़-ए-हुस्न का हुस्न आप ख़रीदार रहा
अनवर देहलवी
उन से हम लौ लगाए बैठे हैं
अनवर देहलवी