Sad Poetry (page 249)
दिल यही सोच के बेताब हुआ जाता है
अनुभव गुप्ता
जुर्म ठहरा हाल से आगे का नक़्शा देखना
अनसर अली अनसर
क्या ख़बर थी कि तिरे साथ ये दुनिया होगी
अंजुम सिद्दीक़ी
हयात-ए-राएगाँ है और मैं हूँ
अंजुम सिद्दीक़ी
ग़म सहें या ख़ुशी को प्यार करें
अंजुम सिद्दीक़ी
दिमाग़ उन के तजस्सुस में जिस्म घर में रहा
अंजुम सिद्दीक़ी
बा-वफ़ा हूँ मिरी ख़ता है ये
अंजुम सिद्दीक़ी
वो इक दिन जाने किस को याद कर के
अंजुम सलीमी
उठाए फिरता रहा मैं बहुत मोहब्बत को
अंजुम सलीमी
उदासी खींच लाई है यहाँ तक
अंजुम सलीमी
तू मिरे सब्र का अंदाज़ा लगा सकता है
अंजुम सलीमी
ठीक से याद भी नहीं अब तो
अंजुम सलीमी
तेरे अंदर की उदासी के मुशाबह हूँ मैं
अंजुम सलीमी
सभी दरवाज़े खुले हैं मिरी तन्हाई के
अंजुम सलीमी
ख़्वाब शर्मिंदा-ए-विसाल हुआ
अंजुम सलीमी
कैसी होती हैं उदासी की जड़ें
अंजुम सलीमी
जब ख़ुदा भी नहीं था साथ मरे
अंजुम सलीमी
इश्क़ फ़रमा लिया तो सोचता हूँ
अंजुम सलीमी
हिज्र में भी हम एक दूसरे के
अंजुम सलीमी
हिज्र को बीच में नहीं छोड़ा
अंजुम सलीमी
एक बे-नाम उदासी से भरा बैठा हूँ
अंजुम सलीमी
दोस्तो मेरे लिए कोई भी अफ़्सुर्दा न हो
अंजुम सलीमी
दर्द से भरता रहा ज़ात के ख़ाली-पन को
अंजुम सलीमी
बुझने दे सब दिए मुझे तन्हाई चाहिए
अंजुम सलीमी
आती जाती हुई तन्हाई को पहचानता हूँ
अंजुम सलीमी
आँख खुल कर अभी मानूस नहीं हो पाती
अंजुम सलीमी
विसाल की तीसरी सम्त
अंजुम सलीमी
तन्हाई का सफ़रनामा
अंजुम सलीमी
तख़्लीक़ की साअतों में
अंजुम सलीमी
सरगोशी
अंजुम सलीमी