Sad Poetry (page 250)
पुर्सा
अंजुम सलीमी
पानी की आवाज़
अंजुम सलीमी
मुहाजिर परिंदों का स्वागत
अंजुम सलीमी
मैं तुम्हारे लिए ले के आया हूँ
अंजुम सलीमी
मैं और मेरी तन्हाई
अंजुम सलीमी
हिसाब-ए-जाँ!!
अंजुम सलीमी
गिर्या
अंजुम सलीमी
एक महबूस नज़्म
अंजुम सलीमी
आइंदगाँ की उदासी में
अंजुम सलीमी
आधी मौत का जन्म
अंजुम सलीमी
उसे छूते हुए भी डर रहा था
अंजुम सलीमी
सुल्ह के बअ'द मोहब्बत नहीं कर सकता मैं
अंजुम सलीमी
सख़्त मुश्किल में किया हिज्र ने आसान मुझे
अंजुम सलीमी
सहर को खोज चराग़ों पे इंहिसार न कर
अंजुम सलीमी
सब को अपने ज़ेहन से झटका ख़ुद को याद किया
अंजुम सलीमी
मैं ख़ुद को मिस्मार कर के मलबा बना रहा हूँ
अंजुम सलीमी
ख़ुद अपने हाथ से क्या क्या हुआ नहीं मिरे साथ
अंजुम सलीमी
ख़ाक छानी न किसी दश्त में वहशत की है
अंजुम सलीमी
कैसी सोहबत है कैसी तन्हाई
अंजुम सलीमी
इन दिनों ख़ुद से फ़राग़त ही फ़राग़त है मुझे
अंजुम सलीमी
इक दूजे को देर से समझा देर से यारी की
अंजुम सलीमी
दर्द-ए-विरासत पा लेने से नाम नहीं चल सकता
अंजुम सलीमी
चराग़ हाथ में हो तो हवा मुसीबत है
अंजुम सलीमी
बुझने दे सब दिए मुझे तन्हाई चाहिए
अंजुम सलीमी
बस एक जिस्म एक ही क़द में पड़ा रहूँ
अंजुम सलीमी
देते नहीं सुझाई जो दुनिया के ख़त्त-ओ-ख़ाल
अंजुम रूमानी
गुज़र रहे हैं गुज़रने वाले
अंजुम रूमानी
यहाँ तो फिर वही दीवार-ओ-दर निकल आए
अंजुम रूमानी
नहीं नाम-ओ-निशाँ साए का लेकिन यार बैठे हैं
अंजुम रूमानी
कुछ अजनबी से लोग थे कुछ अजनबी से हम
अंजुम रूमानी