Sad Poetry (page 251)

जहाँ तक गया कारवान-ए-ख़याल

अंजुम रूमानी

जाए ख़िरद नहीं है कि फ़रज़ाना चाहिए

अंजुम रूमानी

हम से बात में पेच न डाल

अंजुम रूमानी

हर चंद उन्हें अहद फ़रामोश न होगा

अंजुम रूमानी

दुखी दिलों के लिए ताज़ियाना रखता है

अंजुम रूमानी

दिन हो कि रात, कुंज-ए-क़फ़स हो कि सेहन-ए-बाग़

अंजुम रूमानी

दिन हो कि रात कुंज-ए-क़फ़स हो कि सेहन-ए-बाग़

अंजुम रूमानी

तुम को भुला रही थी कि तुम याद आ गए

अंजुम रहबर

तुम को भुला रही थी कि तुम याद आ गए

अंजुम रहबर

रंग इस मौसम में भरना चाहिए

अंजुम रहबर

आग बहते हुए पानी में लगाने आई

अंजुम रहबर

ज़िंदगी अपनी क़रीने से बसर होती नहीं

अंजुम नियाज़ी

किस ने दी मुझ को सदा कौन-ओ-मकाँ के उस तरफ़

अंजुम नियाज़ी

बे-हिफ़ाज़त ही मिरा गंज-ए-मआ'नी रह गया

अंजुम नियाज़ी

वतन के लोग सताते थे जब वतन में थे

अंजुम मानपुरी

वाइ'ज़ की कड़वी बातों को कब ध्यान में अपने लाते हैं

अंजुम मानपुरी

दिल भर आया फिर भी राज़-ए-दिल छुपाना ही पड़ा

अंजुम मानपुरी

अदू तो क्या ये फ़लक भी उसे सता न सका

अंजुम मानपुरी

वस्ल की रात वो तन्हा होगा

अंजुम लुधियानवी

तोड़ कड़ियाँ ज़मीर कि 'अंजुम'

अंजुम लुधियानवी

पल भर उसे रुला कर देख

अंजुम लुधियानवी

ख़ुद से मिलना मिलाना भूल गए

अंजुम लुधियानवी

खोया खोया रहता है

अंजुम लुधियानवी

जाने किस की आहट का इंतिज़ार करता है

अंजुम लुधियानवी

हम सा दीवाना कहाँ मिल पाएगा इस दहर में

अंजुम लुधियानवी

आँखों में तूफ़ान बहुत है

अंजुम लुधियानवी

कहाँ मिला मैं तुझे ये सवाल ब'अद का है

अंजुम ख़याली

अज़ाँ पे क़ैद नहीं बंदिश-ए-नमाज़ नहीं

अंजुम ख़याली

शब-ए-फ़िराक़ अचानक ख़याल आया मुझे

अंजुम ख़याली

कोई तोहमत हो मिरे नाम चली आती है

अंजुम ख़याली