Sad Poetry (page 252)

घर में मिट्टी का दिया मौजूद है

अंजुम ख़याली

ऐ शब-ए-ग़म जो हम भी घर जाएँ

अंजुम ख़याली

आज़ार मिरे दिल का दिल-आज़ार न हो जाए

अंजुम ख़याली

यही तुम पर भी खुलना है

अंजुम ख़लीक़

तुम्हारी पोरों का लम्स अब तक.....

अंजुम ख़लीक़

ख़ुश-आमदीद

अंजुम ख़लीक़

ये कैसी बात मिरा मेहरबान भूल गया

अंजुम ख़लीक़

तहय्युर है बला का ये परेशानी नहीं जाती

अंजुम ख़लीक़

सितमगरों से डरूँ चुप रहूँ निबाह करूँ

अंजुम ख़लीक़

मिरे जुनूँ को हवस में शुमार कर लेगा

अंजुम ख़लीक़

कुछ उज़्र पस-ए-वा'दा-ख़िलाफ़ी नहीं रखते

अंजुम ख़लीक़

कितना ढूँडा उसे जब एक ग़ज़ल और कही

अंजुम ख़लीक़

कार-ए-हुनर सँवारने वालों में आएगा

अंजुम ख़लीक़

कहो क्या मेहरबाँ ना-मेहरबाँ तक़दीर होती है

अंजुम ख़लीक़

हर शे'र से मेरे तिरा पैकर निकल आए

अंजुम ख़लीक़

चाहे तू शौक़ से मुझे वहशत-ए-दिल शिकार कर

अंजुम ख़लीक़

ब-फ़ैज़-ए-आगही ये क्या अज़ाब देख लिया

अंजुम ख़लीक़

याद है क़िस्सा-ए-ग़म का मुझे हर लफ़्ज़ अभी

अंजुम इरफ़ानी

सर-ए-राह मिल के बिछड़ गए था बस एक पल का वो हादसा

अंजुम इरफ़ानी

कोई पुराना ख़त कुछ भूली-बिसरी याद

अंजुम इरफ़ानी

ये रात ढलते ढलते रख गई जवाब के लिए

अंजुम इरफ़ानी

तेशा-ब-कफ़ को आइना-गर कह दिया गया

अंजुम इरफ़ानी

रक़्स-ए-जुनूँ की गर्मी-ए-तासीर देखना

अंजुम इरफ़ानी

जो न हों कुछ तशरीह-तलब कम होते हैं

अंजुम इरफ़ानी

इस ने देखा है सर-ए-बज़्म सितमगर की तरह

अंजुम इरफ़ानी

बड़ी फ़र्ज़-आश्ना है सबा करे ख़ूब काम हिसाब का

अंजुम इरफ़ानी

और कुछ याद नहीं अब से न तब से पूछो

अंजुम इरफ़ानी

अब किसी अंधे सफ़र के लिए तय्यार हुआ चाहता है

अंजुम इरफ़ानी

मुतमइन बैठा हूँ ख़ुद को जान कर

अंजुम फ़ौक़ी बदायूनी

किस का भेद कहाँ की क़िस्मत पगले किस जंजाल में है

अंजुम फ़ौक़ी बदायूनी