Sad Poetry (page 246)
यहाँ काँप जाते हैं फ़लसफ़े ये बड़ा अजीब मक़ाम है
अनवर मिर्ज़ापुरी
वादा-ए-शाम-ए-फ़र्दा पे ऐ दिल मुझे गर यक़ीं ही न आए तो मैं क्या करूँ
अनवर मिर्ज़ापुरी
रुख़ से पर्दा उठा दे ज़रा साक़िया बस अभी रंग-ए-महफ़िल बदल जाएगा
अनवर मिर्ज़ापुरी
मैं तो समझा था जिस वक़्त मुझ को वो मिलेंगे तो जन्नत मिलेगी
अनवर मिर्ज़ापुरी
किसी सूरत भी नींद आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ
अनवर मिर्ज़ापुरी
इस वास्ते दामन चाक किया शायद ये जुनूँ काम आ जाए
अनवर मिर्ज़ापुरी
ख़्वाब बिखरेंगे तो हम को भी बिखरना होगा
अनवर मीनाई
जब ज़मीं के मुक़द्दर सँवर जाएँगे
अनवर मीनाई
हर दम दुआ-ए-आब-ओ-हवा माँगते रहे
अनवर मीनाई
गुम कर दें इक ज़रा तुझे ख़्वाबों के शहर में
अनवर मीनाई
एहसास की रगों में उतरने लगा है वो
अनवर मीनाई
बड़े सुकून से ख़ुद अपने हम-सरों में रहे
अनवर मीनाई
आज मुझे कुछ लोग मिले हैं पागल से
अनवर मीनाई
वहाँ ज़ेर-ए-बहस आते ख़त-ओ-ख़ाल ओ ख़ू-ए-ख़ूबाँ
अनवर मसूद
साथ उस के कोई मंज़र कोई पस-ए-मंज़र न हो
अनवर मसूद
पलकों के सितारे भी उड़ा ले गई 'अनवर'
अनवर मसूद
डूबे हुए तारों पे मैं क्या अश्क बहाता
अनवर मसूद
ऐ दिल-ए-नादाँ किसी का रूठना मत याद कर
अनवर मसूद
मेरी पहली नज़्म
अनवर मसूद
सोचना रूह में काँटे से बिछाए रखना
अनवर मसूद
सर-दर्द में गोली ये बड़ी ज़ूद-असर है
अनवर मसूद
पढ़ने भी न पाए थे कि वो मिट भी गई थी
अनवर मसूद
पढ़ने भी न पाए थे कि वो मिट भी गई थी
अनवर मसूद
मेरी क़िस्मत कि वो अब हैं मिरे ग़म-ख़्वारों में
अनवर मसूद
मैं देख भी न सका मेरे गिर्द क्या गया था
अनवर मसूद
क्यूँ किसी और को दुख दर्द सुनाऊँ अपने
अनवर मसूद
कैसी कैसी आयतें मस्तूर हैं नुक़्ते के बीच
अनवर मसूद
कब तलक यूँ धूप छाँव का तमाशा देखना
अनवर मसूद
जो बारिशों में जले तुंद आँधियों में जले
अनवर मसूद
इशारतों की वो शर्हें वो तज्ज़िया भी गया
अनवर मसूद