Sad Poetry (page 242)
मेरी सोच लरज़ उट्ठी है देख के प्यार का ये आलम
आरिफ़ अब्दुल मतीन
मैं जिस को राह दिखाऊँ वही हटाए मुझे
आरिफ़ अब्दुल मतीन
कितनी हसरत से तिरी आँख का बादल बरसा
आरिफ़ अब्दुल मतीन
जो उभरे वक़्त के साँचे में ढल के
आरिफ़ अब्दुल मतीन
हम भी नादाँ हैं समझते हैं कि छट जाएगी
आरिफ़ अब्दुल मतीन
ढूँढता हूँ सर-ए-सहरा-ए-तमन्ना ख़ुद को
आरिफ़ अब्दुल मतीन
छुपाए दिल में हम अक्सर तिरी तलब भी चले
आरिफ़ अब्दुल मतीन
चाँद मेरे घर में उतरा था कहीं डूबा न था
आरिफ़ अब्दुल मतीन
बजा कि कश्ती है पारा पारा थपेड़े तूफ़ाँ के खा रहा हूँ
आरिफ़ अब्दुल मतीन
'आरिफ़' अज़ल से तेरा अमल मोमिनाना था
आरिफ़ अब्दुल मतीन
मुझे महरूमियों का ग़म नहीं है
आरिफ़ अब्बास
या ख़ुदा कुछ तो दर्द कम कर दे
आराधना प्रसाद
बावरे मन की बावरी ख़ुशबू
आराधना प्रसाद
यूँ देखने में तो ऊपर से सख़्त हूँ शायद
अक़ील शादाब
मेरे ज़ेहन-ओ-दिल में फ़िक्र-ओ-फ़न में था
अक़ील शादाब
मताअ-ओ-माल न दे दौलत-ए-तबाही दे
अक़ील शादाब
मय-कशो जान के लाले नज़र आते हैं मुझे
अक़ील शादाब
हवस-परस्ती ओ ग़ारत-गरी की लत न गई
अक़ील शादाब
बाइ'स-ए-अर्ज़-ए-हुनर कर्ब-ए-निहानी निकला
अक़ील शादाब
असर मिरी ज़बान में नहीं रहा
अक़ील शादाब
वो जानता है उस की दलीलों में दम नहीं
अक़ील नोमानी
तमन्नाएँ जवाँ थीं इश्क़ फ़रमाने से पहले
अक़ील नोमानी
हर इक रंज-ओ-ग़म से सुबुक-दोश हो जा
अक़ील नोमानी
फैली है धूप जज़्बा-ए-इस्फ़ार देख कर
अक़ील जामिद
इस मरीज़-ए-ग़म-ए-ग़ुर्बत को सँभाला दे दो
अक़ील दानिश
हर इश्क़ के मंज़र में था इक हिज्र का मंज़र
अक़ील अब्बास जाफ़री
एहसास-ए-ज़ियाँ हम में से अक्सर में नहीं था
अक़ील अब्बास जाफ़री
सुकून-ए-दिल न मयस्सर हुआ ज़माने में
अनवापुल हसन अनवार
हुस्न हर रंग में मख़्सूस कशिश रखता है
अनवापुल हसन अनवार
भूलने वाले तुझे याद किया है बरसों
अनवापुल हसन अनवार