Sad Poetry (page 241)
तुम्हें प्यार है, तो यक़ीन दो,
आरिफ़ इशतियाक़
ज़िंदगी यूँ करें बसर कब तक
आरिफ़ इशतियाक़
यही होना था और हुआ जानाँ
आरिफ़ इशतियाक़
तुम्हारी याद तारी हो रही है
आरिफ़ इशतियाक़
मुझ को फ़ुर्क़त से गुज़ारा जाएगा
आरिफ़ इशतियाक़
मैं अब उक्ता गया हूँ फुर्क़तों से
आरिफ़ इशतियाक़
गिला तिरे फ़िराक़ का जो आज-कल नहीं रहा
आरिफ़ इशतियाक़
गिला होंटों पे लाए जा रहा हूँ
आरिफ़ इशतियाक़
आख़िरी ख़त मुझे मिला तेरा
आरिफ़ इशतियाक़
तुम्हारे हिज्र में मरना था कौन सा मुश्किल
आरिफ़ इमाम
उस गली से मिरे गुज़रने तक
आरिफ़ इमाम
सुबू में अक्स-ए-रुख़-ए-माहताब देखते हैं
आरिफ़ इमाम
सब लहू जम गया उबाल के बीच
आरिफ़ इमाम
नफ़स की आमद-ओ-शुद को वबाल कर के भी
आरिफ़ इमाम
मुझे मुझ से मिलाती जा रही है
आरिफ़ इमाम
कुछ ऐसे ज़ख़्म-ए-ज़माना का इंदिमाल किया
आरिफ़ इमाम
हालत-ए-हर्फ़ किस ने जानी है
आरिफ़ इमाम
फ़सील-ए-ज़ात से बाहर भी देखना है मुझे
आरिफ़ इमाम
मुझे ब-फ़ैज़-ए-तफ़क्कुर हुआ है ये इदराक
आरिफ़ फ़रहाद
ज़हराब-ए-तिश्नगी का मज़ा हम से पूछिए
आरिफ़ अंसारी
कुछ मिरी सुन कुछ अपनी सुना ज़िंदगी
आरिफ़ अंसारी
दिल क्या किसी की बात से अंदर से कट गया
आरिफ़ अंसारी
दास्ताँ भी मुख़्तलिफ़ लहजा भी यारों से जुदा
आरिफ़ अंसारी
अल्फ़ाज़ के पत्थर क्या फेंके गए पानी में
आरिफ़ अंसारी
हयूले
आरिफ़ अब्दुल मतीन
ज़मीं से ता-ब-फ़लक कोई फ़ासला भी नहीं
आरिफ़ अब्दुल मतीन
वो कारवान-ए-बहाराँ कि बे-दरा होगा
आरिफ़ अब्दुल मतीन
तिरे बाज़ूओं का सहारा तो ले लूँ मगर उन में भी रच गई है थकन
आरिफ़ अब्दुल मतीन
तिरे बाज़ुओं का सहारा तो ले लूँ मगर इन में भी रच गई है थकन
आरिफ़ अब्दुल मतीन
रूह के जलते ख़राबे का मुदावा भी नहीं
आरिफ़ अब्दुल मतीन