Sad Poetry (page 258)

कमाल-ए-हुस्न है हुस्न-ए-कमाल से बाहर

अमजद इस्लाम अमजद

कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा

अमजद इस्लाम अमजद

कभी रक़्स-ए-शाम-ए-बहार में उसे देखते

अमजद इस्लाम अमजद

कब से हम लोग इस भँवर में हैं

अमजद इस्लाम अमजद

जो दिन था एक मुसीबत तो रात भारी थी

अमजद इस्लाम अमजद

जब भी उस शख़्स को देखा जाए

अमजद इस्लाम अमजद

जब भी आँखों में तिरे वस्ल का लम्हा चमका

अमजद इस्लाम अमजद

ग़ुबार-ए-दश्त-ए-तलब में हैं रफ़्तगाँ क्या क्या

अमजद इस्लाम अमजद

एक आज़ार हुई जाती है शोहरत हम को

अमजद इस्लाम अमजद

दूरियाँ सिमटने में देर कुछ तो लगती है

अमजद इस्लाम अमजद

दश्त-ए-दिल में सराब ताज़ा हैं

अमजद इस्लाम अमजद

दश्त-ए-बे-आब की तरह गुज़री

अमजद इस्लाम अमजद

दर-ए-काएनात जो वा करे उसी आगही की तलाश है

अमजद इस्लाम अमजद

दाम-ए-ख़ुशबू में गिरफ़्तार सबा है कब से

अमजद इस्लाम अमजद

बंद था दरवाज़ा भी और अगर में भी तन्हा था मैं

अमजद इस्लाम अमजद

औरों का था बयान तो मौज सदा रहे

अमजद इस्लाम अमजद

अपने होने की तब-ओ-ताब से बाहर न हुए

अमजद इस्लाम अमजद

अपने घर की खिड़की से मैं आसमान को देखूँगा

अमजद इस्लाम अमजद

अगरचे कोई भी अंधा नहीं था

अमजद इस्लाम अमजद

आँखों से इक ख़्वाब गुज़रने वाला है

अमजद इस्लाम अमजद

आईनों में अक्स न हों तो हैरत रहती है

अमजद इस्लाम अमजद

बर्बाद न कर बेकस का चमन बेदर्द ख़िज़ाँ से कौन कहे

अमजद हैदराबादी

यूँ तो क्या क्या नज़र नहीं आता

अमजद हैदराबादी

नज़्म

अमीताभ बच्चन

तुझ को मा'लूम नहीं क्या है तिरी यादों से

अमित शर्मा मीत

तेरी तस्वीरों को देख पिघलती हैं

अमित शर्मा मीत

सुनो यार इस की घुटन कुछ नहीं है

अमित शर्मा मीत

सच कहने का आख़िर ये अंजाम हुआ

अमित शर्मा मीत

क़िस्मत अपनी ऐसी कच्ची निकली है

अमित शर्मा मीत

नज़र भर के यूँ जो मुझे देखता है

अमित शर्मा मीत