Sad Poetry (page 259)

मुझ को पाने के सिवा और तमन्ना क्या है

अमित शर्मा मीत

माज़ी के जब ज़ख़्म उभरने लगते हैं

अमित शर्मा मीत

मैं केवल अब ख़ुद से रिश्ता रक्खूँगा

अमित शर्मा मीत

जब जज़्बा इक बार जिगर में आता है

अमित शर्मा मीत

इक तरफ़ प्यार है रिश्ता है वफ़ादारी है

अमित शर्मा मीत

अपनी आँखों को कभी ठीक से धोया ही नहीं

अमित शर्मा मीत

अपने हिस्से की अना दूँ तो अना दूँ किस को

अमित शर्मा मीत

जगमगा उट्ठा है रंग मंच

अमित गुप्ता

ज़िंदगी बे-क़रार कौन करे

अमित अहद

ख़ुदा की कौन सी है राह बेहतर जानता है

अमित अहद

ज़माने से निराला है उरूस-ए-फ़िक्र का जौबन

अमीरुल्लाह तस्लीम

गर यही है पास-ए-आदाब-ए-सुकूत

अमीरुल्लाह तस्लीम

फ़िक्र है शौक़-ए-कमर इश्क़-ए-दहाँ पैदा करूँ

अमीरुल्लाह तस्लीम

दिल धड़कता है शब-ए-ग़म में कहीं ऐसा न हो

अमीरुल्लाह तस्लीम

वस्ल में बिगड़े बने यार के अक्सर गेसू

अमीरुल्लाह तस्लीम

थक गए तुम हसरत-ए-ज़ौक़-ए-शहादत कम नहीं

अमीरुल्लाह तस्लीम

पारसाई उन की जब याद आएगी

अमीरुल्लाह तस्लीम

क्यूँ ख़राबात में लाफ़-ए-हमा-दानी वाइ'ज़

अमीरुल्लाह तस्लीम

करो न देर जहाँ में जहाँ से आगे चलो

अमीरुल्लाह तस्लीम

कल मिरा था आज वो बुत ग़ैर का होने लगा

अमीरुल्लाह तस्लीम

कहने सुनने से मिरी उन की अदावत हो गई

अमीरुल्लाह तस्लीम

ग़ैब से सहरा-नवरदों का मुदावा हो गया

अमीरुल्लाह तस्लीम

फ़िक्र है शौक़-ए-कमर इश्क़-ए-दहाँ पैदा करूँ

अमीरुल्लाह तस्लीम

इक आफ़त-ए-जाँ है जो मुदावा मिरे दिल का

अमीरुल्लाह तस्लीम

चाहता हूँ पहले ख़ुद-बीनी से मौत आए मुझे

अमीरुल्लाह तस्लीम

भूले से भी न जानिब-ए-अग़्यार देखना

अमीरुल्लाह तस्लीम

बढ़ गई मय पीने से दिल की तमन्ना और भी

अमीरुल्लाह तस्लीम

मिरी ज़िंदगी का हासिल तिरे ग़म की पासदारी

आमिर उस्मानी

हमें आख़िरत में 'आमिर' वही उम्र काम आई

आमिर उस्मानी

आबलों का शिकवा क्या ठोकरों का ग़म कैसा

आमिर उस्मानी