Sad Poetry (page 256)

जहल को आगही बनाते हुए

अम्मार इक़बाल

तुम अगर चाहो तो

अमजद नजमी

तबस्सुम

अमजद नजमी

शिकस्त-ए-जाम

अमजद नजमी

रौशनी कम है

अमजद नजमी

पेच-ओ-ताब

अमजद नजमी

कारवान-ए-हयात

अमजद नजमी

उन के वा'दों का हाल क्या कहिए

अमजद नजमी

तराना-ए-ग़म-ए-पिन्हाँ है हर ख़ुशी अपनी

अमजद नजमी

सुब्ह-दम आया तो क्या हंगाम-ए-शाम आया तो क्या

अमजद नजमी

नहीं कुछ इंतिहा अफ़्सुर्दगी की

अमजद नजमी

न कुछ आलिम समझते हैं न कुछ जाहिल समझते हैं

अमजद नजमी

मुझे दैर भी हो क्यूँ कर न हरम की तरह प्यारा

अमजद नजमी

कितना मुख़्तसर है ये ज़िंदगी का अफ़्साना

अमजद नजमी

जाएँ कहाँ हम आप का अरमाँ लिए हुए

अमजद नजमी

जब कोई लेता है मेरे सामने नाम-ए-ग़ज़ल

अमजद नजमी

जब दिल ही नहीं है पहलू में फिर इश्क़ का सौदा कौन करे

अमजद नजमी

देख कर हम को असीर-ए-आरज़ू

अमजद नजमी

अपनी हस्ती को यहाँ बे-मुद्दआ समझा था मैं

अमजद नजमी

आशुफ़्ता-नवाई से अपनी दुनिया को जगाता जाता हूँ

अमजद नजमी

कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा

अमजद इस्लाम अमजद

ज़रा सी बात

अमजद इस्लाम अमजद

वो अभी अपने चेहरे में उतरा नहीं

अमजद इस्लाम अमजद

तज्दीद

अमजद इस्लाम अमजद

शिकस्त-ए-अना

अमजद इस्लाम अमजद

सेल्फ़ मेड लोगों का अलमिया

अमजद इस्लाम अमजद

समुंदर आसमान और मैं

अमजद इस्लाम अमजद

मोहब्बत की एक नज़्म

अमजद इस्लाम अमजद

ख़ुद-सुपुर्दगी

अमजद इस्लाम अमजद

हम-ज़ाद

अमजद इस्लाम अमजद