Sad Poetry (page 255)
सर-ए-महशर यही पूछूँगा ख़ुदा से पहले
आनंद नारायण मुल्ला
सर-ए-महशर यही पूछूँगा ख़ुदा से पहले
आनंद नारायण मुल्ला
रह-रवी है न रहनुमाई है
आनंद नारायण मुल्ला
क़हर की क्यूँ निगाह है प्यारे
आनंद नारायण मुल्ला
निगाह-ओ-दिल का अफ़्साना क़रीब-ए-इख़्तिताम आया
आनंद नारायण मुल्ला
मिरी बातों पे दुनिया की हँसी कम होती जाती है
आनंद नारायण मुल्ला
मिरी बात का जो यक़ीं नहीं मुझे आज़मा के भी देख ले
आनंद नारायण मुल्ला
ख़मोशी साज़ होती जा रही है
आनंद नारायण मुल्ला
काम इश्क़-ए-बे-सवाल आ ही गया
आनंद नारायण मुल्ला
जुनूँ का दौर है किस किस को जाएँ समझाने
आनंद नारायण मुल्ला
जब दिल में ज़रा भी आस न हो इज़्हार-ए-तमन्ना कौन करे
आनंद नारायण मुल्ला
जान-ए-अफ़्साना यही कुछ भी हो अफ़्साने का नाम
आनंद नारायण मुल्ला
इल्म-ओ-जाह-ओ-ज़ोर-ओ-ज़र कुछ भी न देखा जाए है
आनंद नारायण मुल्ला
फ़र्क़ जो कुछ है वो मुतरिब में है और साज़ में है
आनंद नारायण मुल्ला
दिल की दिल को ख़बर नहीं मिलती
आनंद नारायण मुल्ला
भूले से भी लब पर सुख़न अपना नहीं आता
आनंद नारायण मुल्ला
बशर को मशअ'ल-ए-ईमाँ से आगही न मिली
आनंद नारायण मुल्ला
अरमाँ को छुपाने से मुसीबत में है जाँ और
आनंद नारायण मुल्ला
क़दम क़दम पे हमें रंग-ओ-बू का धोका है
अमृत लाल इशरत
ज़िंदगी इक सवाल है जिस का जवाब मौत है
अम्न लख़नवी
कहानी अपनी अपनी अहल-ए-महफ़िल जब सुनाते हैं
अम्न लख़नवी
ये मय-कश कौन बा-सद लग़्ज़िश-ए-मस्ताना आता है
अम्न लख़नवी
शौक़-ए-सवाब कुछ नहीं ख़ौफ़-ए-अज़ाब कुछ नहीं
अम्न लख़नवी
कहा झुँझला के अहल-ए-क़ाफ़िला से एक रहबर ने
अम्न लख़नवी
हेलुसिनेशन
अम्मार इक़बाल
यूँही बे-बाल-ओ-पर खड़े हुए हैं
अम्मार इक़बाल
तीरगी ताक़ में जड़ी हुई है
अम्मार इक़बाल
पहले हमारी आँख में बीनाई आई थी
अम्मार इक़बाल
मुझ से बनता हुआ तू तुझ को बनाता हुआ मैं
अम्मार इक़बाल
जाओ मातम गुज़ारो जाने दो
अम्मार इक़बाल