Sad Poetry (page 311)
एक उम्र होती है
अहमद राही
दर्द-ए-मुश्तरक
अहमद राही
ये दास्तान-ए-ग़म-ए-दिल कहाँ कही जाए
अहमद राही
वो बे-नियाज़ मुझे उलझनों में डाल गया
अहमद राही
तवील रातों की ख़ामुशी में मिरी फ़ुग़ाँ थक के सो गई है
अहमद राही
तवील रातों की ख़ामुशी में मिरी फ़ुग़ाँ थक के सो गई है
अहमद राही
तन्हाइयों के दश्त में अक्सर मिला मुझे
अहमद राही
क़याम-ए-दैर-ओ-तवाफ़-ए-हरम नहीं करते
अहमद राही
मैं दिल-ज़दा हूँ अगर दिल-फ़िगार वो भी हैं
अहमद राही
महफ़िल महफ़िल सन्नाटे हैं
अहमद राही
लम्हा लम्हा शुमार कौन करे
अहमद राही
कोई माज़ी के झरोकों से सदा देता है
अहमद राही
कोई हसरत भी नहीं कोई तमन्ना भी नहीं
अहमद राही
कोई बतलाए कि क्या हैं यारो
अहमद राही
कभी तिरी कभी अपनी हयात का ग़म है
अहमद राही
कभी हयात का ग़म है कभी तिरा ग़म है
अहमद राही
ग़म-ए-हयात में कोई कमी नहीं आई
अहमद राही
गर्दिश-ए-जाम नहीं गर्दिश-ए-अय्याम तो है
अहमद राही
दिन को रहते झील पर दरिया किनारे रात को
अहमद राही
दिन गुज़रता है कहाँ रात कहाँ होती है
अहमद राही
दिल पे जब दर्द की उफ़्ताद पड़ी होती है
अहमद राही
दिल के वीरान रास्ते भी देख
अहमद राही
दिल के सुनसान जज़ीरों की ख़बर लाएगा
अहमद राही
आम है कूचा-ओ-बाज़ार में सरकार की बात
अहमद राही
शाम को सुब्ह-ए-चमन याद आई
अहमद नदीम क़ासमी
सारी दुनिया हमें पहचानती है
अहमद नदीम क़ासमी
मुसाफ़िर ही मुसाफ़िर हर तरफ़ हैं
अहमद नदीम क़ासमी
मुझे मंज़ूर गर तर्क-ए-तअल्लुक़ है रज़ा तेरी
अहमद नदीम क़ासमी
मैं तेरे कहे से चुप हूँ लेकिन
अहमद नदीम क़ासमी
मैं कश्ती में अकेला तो नहीं हूँ
अहमद नदीम क़ासमी