Sad Poetry (page 312)
ख़ुदा करे कि तिरी उम्र में गिने जाएँ
अहमद नदीम क़ासमी
कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगा
अहमद नदीम क़ासमी
ग़म-ए-जानाँ ग़म-ए-दौराँ की तरफ़ यूँ आया
अहमद नदीम क़ासमी
इक सफ़ीना है तिरी याद अगर
अहमद नदीम क़ासमी
आज की रात भी तन्हा ही कटी
अहमद नदीम क़ासमी
तदफ़ीन
अहमद नदीम क़ासमी
सफ़र और हम-सफ़र
अहमद नदीम क़ासमी
रूह लबों तक आ कर सोचे
अहमद नदीम क़ासमी
क़यामत
अहमद नदीम क़ासमी
पस-ए-आईना
अहमद नदीम क़ासमी
नया साल
अहमद नदीम क़ासमी
महफ़िल-ए-शब
अहमद नदीम क़ासमी
लज़्ज़त-ए-आगही
अहमद नदीम क़ासमी
गीत
अहमद नदीम क़ासमी
दुआ
अहमद नदीम क़ासमी
दश्त-ए-वफ़ा
अहमद नदीम क़ासमी
बीसवीं सदी का इंसान
अहमद नदीम क़ासमी
अक़ीदे
अहमद नदीम क़ासमी
यूँ तो पहने हुए पैराहन-ए-ख़ार आता हूँ
अहमद नदीम क़ासमी
यूँ बे-कार न बैठो दिन भर यूँ पैहम आँसू न बहाओ
अहमद नदीम क़ासमी
वो कोई और न था चंद ख़ुश्क पत्ते थे
अहमद नदीम क़ासमी
उम्र भर उस ने इसी तरह लुभाया है मुझे
अहमद नदीम क़ासमी
तू बिगड़ता भी है ख़ास अपने ही अंदाज़ के साथ
अहमद नदीम क़ासमी
तेरी महफ़िल भी मुदावा नहीं तन्हाई का
अहमद नदीम क़ासमी
तंग आ जाते हैं दरिया जो कुहिस्तानों में
अहमद नदीम क़ासमी
शुऊर में कभी एहसास में बसाऊँ उसे
अहमद नदीम क़ासमी
शाम को सुब्ह-ए-चमन याद आई
अहमद नदीम क़ासमी
साँस लेना भी सज़ा लगता है
अहमद नदीम क़ासमी
क़लम दिल में डुबोया जा रहा है
अहमद नदीम क़ासमी
फूलों से लहू कैसे टपकता हुआ देखूँ
अहमद नदीम क़ासमी