Sad Poetry (page 310)

चाहे हैं तमाशा मिरे अंदर कई मौसम

अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी

हैं शाख़ शाख़ परेशाँ तमाम घर मेरे

अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी

इक ख़्वाब है ये प्यास भी दरिया भी ख़्वाब है

अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी

इक जिस्म हैं कि सर से जुदा होने वाले हैं

अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी

शब ढले गुम्बद-ए-असरार में आ जाता है

अहमद रिज़वान

किसी को छोड़ देता हूँ किसी के साथ चलता हूँ

अहमद रिज़वान

ख़ाक देखी है शफ़क़-ज़ार फ़लक देखा है

अहमद रिज़वान

आता ही नहीं होने का यक़ीं क्या बात करूँ

अहमद रिज़वान

आँखें बनाता दश्त की वुसअत को देखता

अहमद रिज़वान

ग़म-ए-हबीब ग़म-ए-ज़िंदगी ग़म-ए-दौराँ

अहमद रियाज़

फ़र्त-ए-ग़म-ए-हवादिस-ए-दौराँ के बावजूद

अहमद रियाज़

ज़िंदगी ग़म की आँच सह कोई

अहमद रियाज़

क्या क्या मोहब्बतों के ज़माने बदल गए

अहमद रियाज़

क्या क्या मोहब्बतों के ज़माने बदल गए

अहमद रियाज़

हम ही बदलेंगे रह-ओ-रस्म-ए-गुलिस्ताँ यारो

अहमद रियाज़

ब-वस्फ़-ए-शौक़ भी दिल का कहा नहीं करते

अहमद रियाज़

ब वस्फ़-ए-शौक़ भी दिल का कहा नहीं करते

अहमद रियाज़

मन के बरगद तले अँगारों की माला भी जपी

अहमद रज़ी बछरायूनी

ख़ून की हर बूँद पत्थर हो चुकी

अहमद रज़ी बछरायूनी

मिरे हबीब मिरी मुस्कुराहटों पे न जा

अहमद राही

कहीं ये अपनी मोहब्बत की इंतिहा तो नहीं

अहमद राही

जिस तरफ़ जाएँ जहाँ जाएँ भरी दुनिया में

अहमद राही

दिल के सुनसान जज़ीरों की ख़बर लाएगा

अहमद राही

दर्द की बात किसी हँसती हुई महफ़िल में

अहमद राही

ज़िंदगी

अहमद राही

वक़्त की बात

अहमद राही

सरगोशी

अहमद राही

सराब

अहमद राही

लब-ए-गोया

अहमद राही

ग़म-गुसारी

अहमद राही