Sad Poetry (page 308)

मैं यूँ तो नहीं है कि मोहब्बत में नहीं था

अहमद ज़फ़र

किसी परिंदे की वापसी का सफ़र मिरी ख़ाक में मिलेगा

अहमद ज़फ़र

जंगल का सन्नाटा मेरा दुश्मन है

अहमद ज़फ़र

जब तक जुनूँ जुनूँ है ग़म-ए-आगही भी है

अहमद ज़फ़र

इक तसव्वुर तो है तस्वीर नहीं

अहमद ज़फ़र

दिन हुआ कट कर गिरा मैं रौशनी की धार से

अहमद ज़फ़र

और क्या मेरे लिए अरसा-ए-महशर होगा

अहमद ज़फ़र

आसमाँ की आँख सूरज चाँद बीनाई भी है

अहमद ज़फ़र

अपनी ही ज़ात के सहरा में आज

अहमद वसी

ख़ुद को छूने से डरा करते हैं

अहमद वसी

गहराइयों से मुझ को किसी ने निकाल के

अहमद वसी

दर्द ठहरे तो ज़रा दिल से कोई बात करें

अहमद वसी

कितनी ख़ुश-हाल है सारी दुनिया

अहमद वहीद अख़्तर

हर गली कूचे में लश्कर देखो

अहमद वहीद अख़्तर

अपनी ही आवाज़ के क़द के बराबर हो गया

अहमद तनवीर

फिर इस के ब'अद पत्थर हो गया आँखों का पानी

अहमद शनास

मैं ख़ुद अपने आप से हूँ बेगाना सा

अहमद शनास

मैं बात करने लगा था कि लफ़्ज़ गूँगे हुए

अहमद शनास

ख़ुद को पाया था न खोया मैं ने

अहमद शनास

ज़माना हो गया है ख़्वाब देखे

अहमद शनास

ज़माना हो गया है ख़्वाब देखे

अहमद शनास

ये वक़्त रौशनी का मुख़्तसर है

अहमद शनास

सुब्ह-ए-वजूद हूँ कि शब-ए-इंतिज़ार हूँ

अहमद शनास

फूलों में एक रंग है आँखों के नीर का

अहमद शनास

मोहब्बतों को कहीं और पाल कर देखो

अहमद शनास

मिरी आँखों में आ दिल में उतर पैवंद-ए-जाँ हो जा

अहमद शनास

जिस्म के बयाबाँ में दर्द की दुआ माँगें

अहमद शनास

इमरोज़ की कश्ती को डुबोने के लिए हूँ

अहमद शनास

है वाहिमों का तमाशा यहाँ वहाँ देखो

अहमद शनास

दश्त-ए-उम्मीद में ख़्वाबों का सफ़र करना था

अहमद शनास