Sad Poetry (page 309)
बस इक जहान-ए-तहय्युर से आने वाला है
अहमद शनास
जल उठें यादों की क़ंदीलें, सदाएँ डूब जाएँ
अहमद शहरयार
इल्म का दम भरना छोड़ो भी और अमल को भूल भी जाओ
अहमद शहरयार
यादों की तज्सीम पे मेहनत होती है
अहमद शहरयार
वो मर गया सदा-ए-नौहा-गर में कितनी देर है
अहमद शहरयार
फैल रहा है ये जो ख़ाली होने का डर मुझ में
अहमद शहरयार
नए ज़मानों की चाप तो सर पे आ खड़ी थी
अहमद शहरयार
कुन-फ़यकूं का हासिल यानी मिट्टी आग हवा और पानी
अहमद शहरयार
ख़ुश नहीं आए बयाबाँ मिरी वीरानी को
अहमद शहरयार
इनइकास-ए-तिश्नगी सहरा भी है दरिया भी है
अहमद शहरयार
ग़ुबार-ए-वक़्त के गर आर-पार देखिएगा
अहमद शहरयार
दुनिया से हर रिश्ता तोड़ा ख़ुद से रु-गर्दानी की
अहमद शहरयार
अश्क भेजें मौज उभारें अब्र जारी कीजिए
अहमद शहरयार
आईना बन के अपना तमाशा दिखाएँ हम
अहमद शहरयार
सारा आलम धुआँ धुआँ क्यूँ है
अहमद शाहिद ख़ाँ
ले के फिर ज़ख़्मों की सौग़ात बहारो आओ
अहमद शाहिद ख़ाँ
जुनूँ की रस्म ज़माने में आम हो न सकी
अहमद शाहिद ख़ाँ
ग़म के बादल हैं ये ढल जाएँगे रफ़्ता रफ़्ता
अहमद शाहिद ख़ाँ
दिल की ख़्वाहिश बढ़ते बढ़ते तूफ़ाँ होती जाती है
अहमद शाहिद ख़ाँ
शबनम है कि धोका है कि झरना है कि तुम हो
अहमद सलमान
जो हम पे गुज़रे थे रंज सारे जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे
अहमद सलमान
फूल ख़ुशबू उन पे उड़ती तितलियों की ख़ैर हो
अहमद सज्जाद बाबर
फ़ड़फ़ड़ाता हुआ परिंदा है
अहमद सज्जाद बाबर
जागती शब ख़ुदा-हाफ़िज़
अहमद सज्जाद बाबर
बुझती हुई आँखों का अकेला वो दिया था
अहमद सज्जाद बाबर
ज़ख़्म इतने हैं बदन पर कि कहीं दर्द नहीं
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
ये क्या कि आशिक़ी में भी फ़िक्र-ए-ज़ियाँ रहे
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
कुछ देर में ये दिल किसी गिनती में न होगा
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
कोई तस्वीर बना ले कि तुझे याद रहें
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
कहाँ मैं और कहाँ गोशा-नशीनी का ये एलान
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी