Sad Poetry (page 346)

मेरे पास क्या कुछ नहीं

अबरार अहमद

मौत दिल से लिपट गई उस शब

अबरार अहमद

मजीद-अमजद के लिए

अबरार अहमद

कहीं टूटते हैं

अबरार अहमद

हम कि इक भेस लिए फिरते हैं

अबरार अहमद

हवा जब तेज़ चलती है

अबरार अहमद

हवा हर इक सम्त बह रही है

अबरार अहमद

हमारे दुखों का इलाज कहाँ है

अबरार अहमद

आँखें तरस गई हैं

अबरार अहमद

आख़िरी दिन से पहले

अबरार अहमद

आगे बढ़ने वाले

अबरार अहमद

ज़मीं नहीं ये मिरी आसमाँ नहीं मेरा

अबरार अहमद

ये रह-ए-इश्क़ है इस राह पे गर जाएगा तू

अबरार अहमद

ये भी तो कमाल हो गया है

अबरार अहमद

यक़ीन है कि गुमाँ है मुझे नहीं मालूम

अबरार अहमद

तुझ से वाबस्तगी रहेगी अभी

अबरार अहमद

राह दुश्वार भी है बे-सर-ओ-सामानी भी

अबरार अहमद

क़िस्से से तिरे मेरी कहानी से ज़ियादा

अबरार अहमद

क्या जानिए क्या है हद-ए-इदराक से आगे

अबरार अहमद

कुछ काम नहीं है यहाँ वहशत के बराबर

अबरार अहमद

कोई सोचे न हमें कोई पुकारा न करे

अबरार अहमद

कि जैसे कुंज-ए-चमन से सबा निकलती है

अबरार अहमद

कहीं पर सुब्ह रखता हूँ कहीं पर शाम रखता हूँ

अबरार अहमद

जो भी यकजा है बिखरता नज़र आता है मुझे

अबरार अहमद

हम ने रक्खा था जिसे अपनी कहानी में कहीं

अबरार अहमद

हमें ख़बर नहीं कुछ कौन है कहाँ कोई है

अबरार अहमद

इक फ़रामोश कहानी में रहा

अबरार अहमद

और क्या रह गया है होने को

अबरार अहमद

फ़िक्र का गर सिलसिला मौजूद है

अबरार आबिद

हैराँ नहीं हैं हम कि परेशाँ नहीं हैं हम

अब्र अहसनी गनौरी