Sad Poetry (page 41)
वो ज़ार हूँ कि सर पे गुलिस्ताँ उठा लिया
हातिम अली मेहर
वारिद कोह-ए-बयाबाँ जब में दीवाना हुआ
हातिम अली मेहर
उस ज़ुल्फ़ के सौदे का ख़लल जाए तो अच्छा
हातिम अली मेहर
उस का हाल-ए-कमर खुला हमदम
हातिम अली मेहर
सर झुकाता नहीं कभी शीशा
हातिम अली मेहर
पोशाक-ए-सियह में रुख़-ए-जानाँ नज़र आया
हातिम अली मेहर
नाला-ए-गर्म के और दम सर्द भरे क्या जिएँ हम तो मरे
हातिम अली मेहर
न दिया बोसा-ए-लब खा के क़सम भूल गए
हातिम अली मेहर
मेरे ही दिल के सताने को ग़म आया सीधा
हातिम अली मेहर
कूचा में जो उस शोख़-हसीं के न रहेंगे
हातिम अली मेहर
कोई ले कर ख़बर नहीं आता
हातिम अली मेहर
करते हैं शौक़-ए-दीद में बातें हवा से हम
हातिम अली मेहर
करें क्या हवस करें क्या हवस करें क्या हवस करें क्या हवस
हातिम अली मेहर
जो मेहंदी का बुटना मला कीजिएगा
हातिम अली मेहर
ईज़ाएँ उठाए हुए दुख पाए हुए हैं
हातिम अली मेहर
इश्क़-ए-जान-ए-जहाँ नसीब हुआ
हातिम अली मेहर
इस दौर में हर इक तह-ए-चर्ख़-ए-कुहन लुटा
हातिम अली मेहर
हम से किनारा क्यूँ है तिरे मुब्तला हैं हम
हातिम अली मेहर
गुज़रा अपना पस-ए-मुर्दन ही सही
हातिम अली मेहर
गुल-बाँग थी गुलों की हमारा तराना था
हातिम अली मेहर
ग़ैर हँसते हैं फ़क़त इस लिए टल जाता हूँ
हातिम अली मेहर
गरेबाँ हाथ में है पाँव में सहरा का दामाँ है
हातिम अली मेहर
डुबोएगी बुतो ये जिस्म दरिया-बार पानी में
हातिम अली मेहर
दोपहर रात आ चुकी हीला-बहाना हो चुका
हातिम अली मेहर
दिल ले गई वो ज़ुल्फ़-ए-रसा काम कर गई
हातिम अली मेहर
चैन पहलू में उसे सुब्ह नहीं शाम नहीं
हातिम अली मेहर
बुतों का ज़िक्र करो वाइज़ ख़ुदा को किस ने देखा है
हातिम अली मेहर
आलम-ए-हैरत का देखो ये तमाशा एक और
हातिम अली मेहर
आफ़्ताब अब नहीं निकलने का
हातिम अली मेहर
ये मुमकिन है कि मिल जाएँ तिरी खोई हुई चीज़ें
हस्तीमल हस्ती