Sad Poetry (page 40)

हज़ीं तुम अपनी कभी वज़्अ भी सँवारोगे

हज़ीं लुधियानवी

हैरान सारा शहर था जिस की उड़ान पर

हज़ीं लुधियानवी

दर्द के सीप में पैदा हुई बेदारी सी

हज़ीं लुधियानवी

आँसू को अपने दीदा-ए-तर से निकालना

हज़ीं लुधियानवी

हो के अफ़्सुर्दा मिरी शूमी-ए-तक़दीर न देख

हज़ार लखनवी

ये जो हर शय में तिरी जल्वागरी है ऐ दोस्त

हज़ार लखनवी

महदूद-निगाही के सनम टूट रहे हैं

हयात वारसी

जो मय-कदे में बहकते हैं लड़खड़ाते हैं

हयात वारसी

फ़सील-ए-शुक्र में हैं सब्र के हिसार में हैं

हयात वारसी

हर सदा से बच के वो एहसास-ए-तन्हाई में है

हयात लखनवी

वो बद-दुआ उसे समझे अगर दुआ लिक्खूँ

हयात लखनवी

सिलसिला ख़्वाबों का सब यूँही धरा रह जाएगा

हयात लखनवी

मैं ख़ाल-ओ-ख़द का सरापा तसव्वुरात में था

हयात लखनवी

महक किरदार की आती रही है

हयात लखनवी

कई सितारे यहाँ टूटते बिखरते हैं

हयात लखनवी

कब क़ाबिल-ए-तक़लीद है किरदार हमारा

हयात लखनवी

रहें ग़म की शरर-अंगेज़ियाँ या-रब क़यामत तक

हया लखनवी

शौक़ कहता है कि चलिए कू-ए-जानाँ की तरफ़

हया लखनवी

निगाह-ए-शौक़ अगर दिल की तर्जुमाँ हो जाए

हया लखनवी

न होती हाल-ए-दिल कहने की गर हिम्मत तो अच्छा था

हया लखनवी

चमन वही है घटाएँ वही बहार वही

हया लखनवी

सैंडिलों और झाड़ूओं से रोज़ मुझ को झाड़ना

हातिम भट्टी

हम को अब भी नहर पर जा कर नहाना याद है

हातिम भट्टी

याद रखने की ये बातें हैं बजा है सच है

हातिम अली मेहर

याद में इक शोख़ पंजाबी के रोते हैं जो हम

हातिम अली मेहर

तू ने वहदत को कर दिया कसरत

हातिम अली मेहर

न ले जा दैर से का'बा हमें ज़ाहिद कि हम वाँ भी

हातिम अली मेहर

मजमा' में रक़ीबों के खुला था तिरा जूड़ा

हातिम अली मेहर

ज़ुल्फ़ अंधेर करने वाली है

हातिम अली मेहर

ज़िक्र-ए-जानाँ कर जो तुझ से हो सके

हातिम अली मेहर