Sad Poetry (page 38)
ये विसाल ओ हिज्र का मसअला तो मिरी समझ में न आ सका
हिलाल फ़रीद
वक़्त ने रंग बहुत बदले क्या कुछ सैलाब नहीं आए
हिलाल फ़रीद
वही हुआ कि ख़ुद भी जिस का ख़ौफ़ था मुझे
हिलाल फ़रीद
सब कुछ खो कर मौज उड़ाना इश्क़ में सीखा
हिलाल फ़रीद
रुकने के लिए दस्त-ए-सितम-गर भी नहीं था
हिलाल फ़रीद
रास्ता देर तक सोचता रह गया
हिलाल फ़रीद
कभी तो सेहन-ए-अना से निकले कहीं पे दश्त-ए-मलाल आया
हिलाल फ़रीद
हम ख़ुद भी हुए नादिम जब हर्फ़-ए-दुआ निकला
हिलाल फ़रीद
आँखों में वो ख़्वाब नहीं बसते पहला सा वो हाल नहीं होता
हिलाल फ़रीद
शब-ए-फ़िराक़ कुछ ऐसा ख़याल-ए-यार रहा
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
न दर्द था न ख़लिश थी न तिलमिलाना था
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
मुझे वो याद करते हैं ये कह कर
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
क्या रश्क है कि एक का है एक मुद्दई
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
कुछ ख़बर है तुझे ओ चैन से सोने वाले
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
कभी ये फ़िक्र कि वो याद क्यूँ करेंगे हमें
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
हज़ार रंज हैं अब ये भी इक ज़माना है
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
ऐ हिज्र वक़्त टल नहीं सकता है मौत का
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
वो ये कहते हैं ज़माने की तमन्ना मैं हूँ
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
वो शोख़ बाम पे जब बे-नक़ाब आएगा
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
तुम भी निगाह में हो अदू भी नज़र में है
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
सितम तीर-ए-निगाह-ए-दिलरुबा था
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
शब-ए-फ़िराक़ कुछ ऐसा ख़याल-ए-यार रहा
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
मुझे फ़रेब-ए-वफ़ा दे के दम में लाना था
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
कुछ मोहब्बत में अजब शेव-ए-दिल-दार रहा
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
दिल फ़ुर्क़त-ए-हबीब में दीवाना हो गया
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
है जब तक दश्त-पैमाई सलामत
हिजाब अब्बासी
मैं अक्सर सोचती हूँ ज़िंदगी को कौन लिक्खेगा
हिजाब अब्बासी
है जब तक दश्त-पैमाई सलामत
हिजाब अब्बासी
ज़िंदगी से मिली सौग़ात ये तन्हाई की
हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी
रास आई न मुझे अंजुमन-आराई भी
हिदायतुल्लाह ख़ान शम्सी