Sad Poetry (page 37)
मुद्दत के बाद
हिमायत अली शाएर
हरीफ़-ए-विसाल
हिमायत अली शाएर
हारून की आवाज़
हिमायत अली शाएर
दूसरा तजरबा
हिमायत अली शाएर
अन-कही
हिमायत अली शाएर
आईना-दर-आईना
हिमायत अली शाएर
ये शहर-ए-रफ़ीक़ाँ है दिल-ए-ज़ार सँभल के
हिमायत अली शाएर
ये बात तो नहीं है कि मैं कम स्वाद था
हिमायत अली शाएर
यम-ब-यम फैला हुआ है प्यास का सहरा यहाँ
हिमायत अली शाएर
रात सुनसान दश्त ओ दर ख़ामोश
हिमायत अली शाएर
पिंदार-ए-ज़ोहद हो कि ग़ुरूर-ए-बरहमनी
हिमायत अली शाएर
नाला-ए-ग़म शो'ला-असर चाहिए
हिमायत अली शाएर
मेरा शुऊ'र मुझ को ये आज़ार दे गया
हिमायत अली शाएर
मंज़िल के ख़्वाब देखते हैं पाँव काट के
हिमायत अली शाएर
मैं जो कुछ सोचता हूँ अब तुम्हें भी सोचना होगा
हिमायत अली शाएर
क्या क्या न ज़िंदगी के फ़साने रक़म हुए
हिमायत अली शाएर
कब तक रहूँ मैं ख़ौफ़-ज़दा अपने आप से
हिमायत अली शाएर
इस दश्त-ए-सुख़न में कोई क्या फूल खिलाए
हिमायत अली शाएर
इस दश्त पे एहसाँ न कर ऐ अब्र-ए-रवाँ और
हिमायत अली शाएर
हर क़दम पर नित-नए साँचे में ढल जाते हैं लोग
हिमायत अली शाएर
दस्तक हवा ने दी है ज़रा ग़ौर से सुनो
हिमायत अली शाएर
बदन पे पैरहन-ए-ख़ाक के सिवा क्या है
हिमायत अली शाएर
अपना अंदाज़-ए-जुनूँ सब से जुदा रखता हूँ मैं
हिमायत अली शाएर
अब बताओ जाएगी ज़िंदगी कहाँ यारो
हिमायत अली शाएर
आँख की क़िस्मत है अब बहता समुंदर देखना
हिमायत अली शाएर
आज की शब जैसे भी हो मुमकिन जागते रहना
हिमायत अली शाएर
आए थे तेरे शहर में कितनी लगन से हम
हिमायत अली शाएर
अपने दुख में रोना-धोना आप ही आया
हिलाल फ़रीद
आज फिर दब गईं दर्द की सिसकियाँ
हिलाल फ़रीद
आज न हम से पूछिए कैसा कमाल हो गया
हिलाल फ़रीद