Sad Poetry (page 35)
मर-मिटे जब से हम उस दुश्मन-ए-दीं पर साहब
हुसैन मजरूह
राहत ओ रंज से जुदा हो कर
हुसैन आबिद
कभी वफ़ूर-ए-तमन्ना कभी मलामत ने
हुसैन आबिद
ज़ौक़-ए-तकल्लुम पर उर्दू ने राह अनोखी खोली है
हुरमतुल इकराम
यगानगी में भी दुख ग़ैरियत के सहता हूँ
हुरमतुल इकराम
वो दिल समो ले जो दामन में काएनात का कर्ब
हुरमतुल इकराम
वो दिल जो था किसी के ग़म का महरम हो गया रुस्वा
हुरमतुल इकराम
वक़्त गर्दिश में ब-अंदाज़-ए-दिगर है कि जो था
हुरमतुल इकराम
उस के सिवा क्या अपनी दौलत
हुरमतुल इकराम
ठहरेगा वही रन में जो हिम्मत का धनी है
हुरमतुल इकराम
तय किया इस तरह सफ़र तन्हा
हुरमतुल इकराम
सूरत-ए-सब्ज़ा-ए-बे-गाना चमन से गुज़रे
हुरमतुल इकराम
रह-ए-तलब में बड़ी तुर्फ़गी के साथ चले
हुरमतुल इकराम
ख़्वाबों के साथ ज़ेहन की अंगड़ाइयाँ भी हैं
हुरमतुल इकराम
जैसे जैसे दर्द का पिंदार बढ़ता जाए है
हुरमतुल इकराम
फ़रोग़-ए-दीदा-वरी का ज़माना आया है
हुरमतुल इकराम
एक दुनिया कह रही है कौन किस का आश्ना
हुरमतुल इकराम
दिल को तौफ़ीक़-ए-ज़ियाँ हो तो ग़ज़ल होती है
हुरमतुल इकराम
अपने चमन पे अब्र ये कैसा बरस गया
हुरमतुल इकराम
जैसे कोई ज़िद्दी बच्चा कब बहले बहलाने से
हुमैरा रहमान
दिल को दरून-ए-ख़्वाब का मौसम बोझल रखता है
हुमैरा रहमान
ये किस की याद की बारिश में भीगता है बदन
हुमैरा राहत
वो इश्क़ को किस तरह समझ पाएगा जिस ने
हुमैरा राहत
तअल्लुक़ की नई इक रस्म अब ईजाद करना है
हुमैरा राहत
मिरे दिल के अकेले घर में 'राहत'
हुमैरा राहत
ख़ुशी मेरी गवारा थी न क़िस्मत को न दुनिया को
हुमैरा राहत
ये कहना था जो दुनिया कह रही है
हुमैरा राहत
वक़्त की आँख से कुछ ख़्वाब नए माँगता है
हुमैरा राहत
तअल्लुक़ की नई इक रस्म अब ईजाद करना है
हुमैरा राहत
मैं आब-ए-इश्क़ में हल हो गई हूँ
हुमैरा राहत