Sad Poetry (page 43)
चोरी चोरी हम से तुम आ कर मिले थे जिस जगह
हसरत मोहानी
छेड़ा है दस्त-ए-शौक़ ने मुझ से ख़फ़ा हैं वो
हसरत मोहानी
अल्लाह-री जिस्म-ए-यार की ख़ूबी कि ख़ुद-ब-ख़ुद
हसरत मोहानी
ऐ याद-ए-यार देख कि बा-वस्फ़-ए-रंज-ए-हिज्र
हसरत मोहानी
याद कर वो दिन कि तेरा कोई सौदाई न था
हसरत मोहानी
वो चुप हो गए मुझ से क्या कहते कहते
हसरत मोहानी
उस बुत के पुजारी हैं मुसलमान हज़ारों
हसरत मोहानी
उन को रुस्वा मुझे ख़राब न कर
हसरत मोहानी
उन को जो शुग़्ल-ए-नाज़ से फ़ुर्सत न हो सकी
हसरत मोहानी
तुझ से गरवीदा यक ज़माना रहा
हसरत मोहानी
तोड़ कर अहद-ए-करम ना-आश्ना हो जाइए
हसरत मोहानी
तिरे दर्द से जिस को निस्बत नहीं है
हसरत मोहानी
तासीर-ए-बर्क़-ए-हुस्न जो उन के सुख़न में थी
हसरत मोहानी
ताबाँ जो नूर-ए-हुस्न ब-सिमा-ए-इश्क़ है
हसरत मोहानी
सियहकार थे बा-सफ़ा हो गए हम
हसरत मोहानी
सितम हो जाए तम्हीद-ए-करम ऐसा भी होता है
हसरत मोहानी
रविश-ए-हुस्न-ए-मुराआत चली जाती है
हसरत मोहानी
रौशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम
हसरत मोहानी
क़िस्मत-ए-शौक़ आज़मा न सके
हसरत मोहानी
क़वी दिल शादमाँ दिल पारसा दिल
हसरत मोहानी
पैरव-ए-मस्लक-ए-तस्लीम-ओ-रज़ा होते हैं
हसरत मोहानी
निगाह-ए-यार जिसे आश्ना-ए-राज़ करे
हसरत मोहानी
नज़्ज़ारा-ए-पैहम का सिला मेरे लिए है
हसरत मोहानी
न सूरत कहीं शादमानी की देखी
हसरत मोहानी
न सही गर उन्हें ख़याल नहीं
हसरत मोहानी
मुक़र्रर कुछ न कुछ इस में रक़ीबों की भी साज़िश है
हसरत मोहानी
महरूम-ए-तरब है दिल-ए-दिल-गीर अभी तक
हसरत मोहानी
लुत्फ़ की उन से इल्तिजा न करें
हसरत मोहानी
क्या वो अब नादिम हैं अपने जौर की रूदाद से
हसरत मोहानी
क्या तुम को इलाज-ए-दिल-ए-शैदा नहीं आता
हसरत मोहानी