Sad Poetry (page 49)
बे-इल्तिफ़ाती
हसन नईम
यही तो ग़म है वो शाइ'र न वो सियाना था
हसन नईम
याद का फूल सर-ए-शाम खिला तो होगा
हसन नईम
वो कज-निगाह न वो कज-शिआ'र है तन्हा
हसन नईम
वो जो दर्द था तिरे इश्क़ का वही हर्फ़ हर्फ़-ए-सुख़न में है
हसन नईम
वो भी कहता था कि उस ग़म का मुदावा ही नहीं
हसन नईम
वहशत-ए-जाँ को पयाम-ए-निगह-ए-नाज़ तो दो
हसन नईम
उसी ख़ुश-नवा में हैं सब हुनर मुझे पहले था न क़यास भी
हसन नईम
उम्मीद ओ यास ने क्या क्या न गुल खिलाए हैं
हसन नईम
सुब्ह-ए-तरब तो मस्त-ओ-ग़ज़ल-ख़्वाँ गुज़र गई
हसन नईम
रश्क अपनों को यही है हम ने जो चाहा मिला
हसन नईम
रात गुज़री कि शब-ए-वस्ल का पैग़ाम मिला
हसन नईम
क़सीदा तुझ से ग़ज़ल तुझ से मर्सिया तुझ से
हसन नईम
क़ल्ब-ओ-जाँ में हुस्न की गहराइयाँ रह जाएँगी
हसन नईम
पैकर-ए-नाज़ पे जब मौज-ए-हया चलती थी
हसन नईम
ना-उमीदी ने यूँ सताया था
हसन नईम
मुझ को कोई भी सिला मिलने में दुश्वारी न थी
हसन नईम
माल-ओ-मता-ए-दश्त सराबों को दे दिया
हसन नईम
मैं किस वरक़ को छुपाऊँ दिखाऊँ कौन सा बाब
हसन नईम
मैं जनम जनम का अनीस हूँ किसी तौर दिल में बसा मुझे
हसन नईम
मैं ग़ज़ल का हर्फ़-ए-इम्काँ मसनवी का ख़्वाब हूँ
हसन नईम
कू-ए-रुसवाई से उठ कर दार तक तन्हा गया
हसन नईम
कुछ उसूलों का नशा था कुछ मुक़द्दस ख़्वाब थे
हसन नईम
कोह के सीने से आब-ए-आतशीं लाता कोई
हसन नईम
किसी हबीब ने लफ़्ज़ों का हार भेजा है
हसन नईम
ख़्वाब की राह में आए न दर-ओ-बाम कभी
हसन नईम
ख़ुर्शीद की निगाह से शबनम को आस क्या
हसन नईम
ख़ैर से दिल को तिरी याद से कुछ काम तो है
हसन नईम
करें न याद वो शब हादिसा हुआ सो हुआ
हसन नईम
करें न याद शब-ए-हादिसा हुआ सो हुआ
हसन नईम