Sad Poetry (page 53)
क्या होता है ख़िज़ाँ बहार के आने जाने से
हसन अकबर कमाल
क्या गुमाँ था कि न होगा कोई हम-सर अपना
हसन अकबर कमाल
हुनर जो तालिब-ए-ज़र हो हुनर नहीं रहता
हसन अकबर कमाल
हो तेरी याद का दिल में गुज़र आहिस्ता आहिस्ता
हसन अकबर कमाल
है तन्हाई में बहना आँसुओं का
हसन अकबर कमाल
ग़ज़ल में हुस्न का उस के बयान रखना है
हसन अकबर कमाल
ग़म-ए-जाँ गुम ग़म-ए-दुनिया में तो होना मुश्किल
हसन अकबर कमाल
दुनिया में कितने रंग नज़र आएँगे नए
हसन अकबर कमाल
दिल में तिरे ख़ुलूस समोया न जा सका
हसन अकबर कमाल
याद-ए-याराँ दिल में आई हूक बन कर रह गई
हसन आबिदी
दिल की दहलीज़ पे जब शाम का साया उतरा
हसन आबिदी
'हबीब-जालिब'
हसन आबिदी
उम्मीद का बाब लिख रहा हूँ
हसन आबिदी
सुब्ह आँख खुलती है एक दिन निकलता है
हसन आबिदी
शहर-ए-ना-पुरसाँ में कुछ अपना पता मिलता नहीं
हसन आबिदी
पल रहे हैं कितने अंदेशे दिलों के दरमियाँ
हसन आबिदी
कौन देखे मेरी शाख़ों के समर टूटे हुए
हसन आबिदी
हम तीरगी में शम्अ जलाए हुए तो हैं
हसन आबिदी
दिल की दहलीज़ पे जब शाम का साया उतरा
हसन आबिदी
ख़फ़ा हो मुझ से तो अपने अंदर
हसन अब्बासी
आज तेरी याद से टकरा के टुकड़े हो गया
हसन अब्बासी
उदास शामों बुझे दरीचों में लौट आया
हसन अब्बासी
रात-दिन पुर-शोर साहिल जैसा मंज़र मुझ में था
हसन अब्बासी
रात ये कौन मिरे ख़्वाब में आया हुआ था
हसन अब्बासी
ख़मोश रह कर पुकारती है
हसन अब्बासी
मैं तर्क-ए-तअल्लुक़ पे भी आमादा हूँ लेकिन
हसन अब्बास रज़ा
धड़कती क़ुर्बतों के ख़्वाब से जागे तो जाना
हसन अब्बास रज़ा
तीसरी आँख
हसन अब्बास रज़ा
शाएरी पूरा मर्द और पूरी औरत माँगती है
हसन अब्बास रज़ा
सफ़र दीवार-ए-गिर्या का
हसन अब्बास रज़ा