Ghazal Poetry (page 101)
आज फिर वक़्त कोई अपनी निशानी माँगे
सय्यद शकील दस्नवी
आज फिर वक़्त कोई अपनी निशानी माँगे
सय्यद शकील दस्नवी
उस ने रुख़ से हटा के बालों को
सय्यद शफ़क़ शाह चिश्ती
क्या भरोसा है उन्हें छोड़ के लाचार न जा
सय्यद सग़ीर सफ़ी
कही बात उस ने भी ख़दशात की
सय्यद सग़ीर सफ़ी
झील आँखें थीं गुलाबों सी जबीं रखता था
सय्यद सग़ीर सफ़ी
इतने इम्कान कब हुए पहले
सय्यद सग़ीर सफ़ी
इंसान की हालत पर अब वक़्त भी हैराँ है
सय्यद सग़ीर सफ़ी
है समाँ हर तरफ़ बदलने को
सय्यद सग़ीर सफ़ी
भूल मेरी क़ुबूल की उस ने
सय्यद सग़ीर सफ़ी
बनाया है शहकार यूँ तेरे ग़म ने
सय्यद सग़ीर सफ़ी
अपने ख़्वाबों के पास रहने दे
सय्यद सग़ीर सफ़ी
ऐसा भी नहीं दर्द के मारे नहीं देखे
सय्यद सादिक़ अली हसीन
तू नहीं है तो ज़िंदगी है उदास
सय्यद प्रवेज़
हाए वो मुस्कुराए जाते हैं
सय्यद प्रवेज़
तंदुरुस्ती दी ख़ुदा ने तो नक़ाहत न गई
सय्यद नज़ीर हसन सख़ा देहलवी
सितम करना करम करना वफ़ा करना जफ़ा करना
सय्यद नज़ीर हसन सख़ा देहलवी
न हो तू जिस में वो दिल भी है क्या दिल
सय्यद नज़ीर हसन सख़ा देहलवी
मेरी निगह में यार मैं उस की निगाह में
सय्यद नज़ीर हसन सख़ा देहलवी
मिरी जाँ सरसरी मिलने से क्या मालूम होता है
सय्यद नज़ीर हसन सख़ा देहलवी
कभी बहार न आई बहार की सूरत
सय्यद नज़ीर हसन सख़ा देहलवी
यूँ तो वो दर्द-आश्ना भी हैं
सय्यद नवाब हैदर नक़वी
दिल-ए-मुज़्तर की दवा कीजिएगा
सय्यद नवाब हैदर नक़वी
याद के त्यौहार में वस्ल-ओ-वफ़ा सब चाहिए
सय्यद मुनीर
तू अपने हुस्न की आराइशों में गुम हो जा
सय्यद मुनीर
तर्क-ए-उल्फ़त में कोई यकता न था
सय्यद मुनीर
साया-ए-ज़ुल्म सर-ए-ख़ल्क़-ए-ख़ुदा होता है
सय्यद मुनीर
रिवाज-ओ-रस्म का उस को हुनर भी आता है
सय्यद मुनीर
नज़र पे बैठ गया जो ग़ुबार किस का था
सय्यद मुनीर
हम से पहले तो कोई यूँ न फिरा आवारा
सय्यद मुनीर